कर्मचारी की बात सुन पुलिस कर्मचारी वकिलो के ऊपर मामला दर्ज कर दिया, कर्मचारी धर्म निभाया, पर कानुन धर्म भी निभाना उसका कर्तव्य है,भारत में बने संविधान को पालन करना भी उसका कर्तव्य हैं, कानुन सबके लिए एक है, उसे पालन करते हुए , कर्मचारी के ऊपर भी मामला दर्ज करना चाहिए था,आग पहले कर्मचारी ने लगाई,आग बुझाते – बुझाते वकिलो को आग में झुलसना पड़ा उसके बाद भी उनको राहत नहीं मिली यह कहावत उनके में लागू हो गई , जैसे -,उल्टा चोर कोतवाल को डरवाये ,, आप सब अच्छी खासी से जानते हैं एक अधिवक्ता अपने क्लाइंट को जीत दिलाने के लिए धरती आसमान एक कर देता है, उसे रात -रात भर बड़ा – बड़ा पुस्तक पढ़ना पढ़ता है, साथ ही अपने घर परिवार को देखना पड़ता है सभी जिम्मेदारी को बखूबी से निभाना पड़ता हैं समय पर अपने घर परिवार की जरूरते पूरा नहीं करने पर घर की दो बात सुनना पड़ता है दफ़्तर समय पर नहीं पहुंचने पर उसके क्लाइंट दो चार शब्द सुना देता है, वकिल साहब दफ्तर का भृत्य दो बार हांक लगा चुंका आप अभी आ रहे हो, केस हार जाता है ,तो वकिल जिम्मेदार,वकिल गलत पकड़ लिये तो केस
हार गये, कोई नहीं सोचता अधिकारी गलत किया बाबू गलत किया बल्कि वकिल के ऊपर यह इल्जाम और लगा देता है उसके विरोधी वकिल से मिल गये, पर ये नहीं सोचता बाबू और विरोधी मिल गये, बाबू अधिकारी मिल लिये, आज वहीं वकिल तहसीलदार से मिलकर सामने वाला अन्यायी को जिताने में साथ दे देता तो न तो कुछ विवाद होता न ही दूनिया भर का प्रपंच आज सत्य को जिताने के चक्कर में वकिल को मां बहन की गाली सुनना पड़ा उसके सम्मान में आंच आया साथ ही उसके खिलाफ मामला दर्ज हुआ ये सरासर ग़लत है वकिलो के खिलाफ जो धाराये लगाये गये उसे वापस लिया जाना चाहिए नही तो सामने वाले के खिलाफ भी बराबर धाराये लगाने चाहिए ,सामने वाला भी दोषी है, कानुन ये नहीं कहती दो गलत करें एक के ऊपर मामला दर्ज दूसरे को दोष मुक्त करें । अब अधिवक्ता संघ और कर्मचारी संघ दोनों अड़े दिख रहे हैं अपने अपने बात पर वही कर्मचारी संघ ने तो तहसील दफ्तर के बहार चांदनी भी गाड़ दी है जैसे नाटक मण्डली बुला रहे हैं, वही अधिवक्ता संघ सत्य की राह पर चलकर भी उसे अपने आप को सत्य साबित करने को मजबूर दिख रही हैं , क्यों कि कर्मचारी संघ ,ही मामला दर्ज करने की अधिकारी है ,उसके हाथ में है खेला निला, पर सत्य को पराजित नहीं कर सकता,

