महारैली की रूपरेखा तय, प्रदेश के सभी जिला एवं तहसील मुख्यालयों से आएंगे अधिवक्ता
रायगढ़। अधिवक्ता संघ रायगढ़ की ओर से भ्रष्टाचार के खिलाफ चलाए जा रहे आंदोलन में भाग लेने प्रदेश भर सभी जिला एवं तहसील मुख्यालयों से अधिवक्ता रायगढ़ पहुंचेंगे । रायगढ़ के अंबेडकर चौक में धरना स्थल मैं सभी इकट्ठे होंगे और बाबा साहब भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा में माल्यार्पण के पश्चात रैली कलेक्ट्रेट होते हुए शनि मंदिर रामनिवास टॉकीज चौक, सुभाष चौक , गांधी प्रतिमा श्याम टॉकीज रोड होते हुए गद्दी चौक पुत्री शाला रोड तमस्कर, गौरी शंकर मंदिर गोपी टॉकीज और चक्रधर नगर चौक होते हुए अंबेडकर प्रतिमा के पास स्थित धरना स्थल मैं इस रैली का समापन होगा। रैली के पश्चात बीएसएनएल कार्यालय के सामने स्थित सिंधी धर्मशाला में प्रदेश के सभी जिला एवं तहसील मुख्यालयों से आए अधिवक्ता संघ के प्रतिनिधियों के साथ आगे की रणनीति पर चर्चा होगी।
सभी पांच अधिवक्ता जेल से हुए रिहा
रायगढ़ तहसील में कर्मचारियों से विवाद के आरोप में रायगढ़ जेल में निरुद्ध तीन अधिवक्ता दीपक मोडक जितेंद्र शर्मा एवं कोमल साहू की रायगढ़ न्यायालय ने नियमित जमानत मंजूर कर ली है। जिसके बाद अधिवक्ता संघ के बीच अपने साथियों को जमानत मिलने की बात पर उत्साह का माहौल है। जमानत के लिए तीन सीनियर अधिवक्ता विजय सर्राफ, अभिजीत मलिक एवं एमएस रथ ने पैरवी पैरवी की । तहसील कार्यालय में विवाद के आरोप में कुल 5 अधिवक्ताओं पर एफ आई आर किया गया था। सबसे पहले गिरफ्तार किए गए अधिवक्ता भुवन साव की जमानत रायगढ़ कोर्ट में खाली हो गई थी जिसके पश्चात हाईकोर्ट से जमानत पूर्व में मिल चुकी है । जबकि शेष 4 अधिवक्ताओं की जमानत रायगढ़ कोर्ट से मिल गई। सोमवार को अधिवक्ता कोमल साहू, दीपक मोडक और जितेंद्र शर्मा को भी जमानत मिल गई है। इसके अलावा 2 दिन पहले अधिवक्ता महेश प्रसाद पटेल को भी रायगढ़ कोर्ट से जमानत मिल चुकी है । इस प्रकार अब सभी 5 अधिवक्ताओं की जमानत मंजूर हो चुकी है और सभी जेल से रिहा हो चुके हैं।
फरवरी रविवार को रायगढ़ में आयोजित विशाल रैली के संबंध में रायगढ़ अधिवक्ता संघ के कोर कमेटी की बैठक हुई जिसमें विभिन्न बिंदुओं पर फैसले लिए गए और पूरे कार्यक्रम की रूपरेखा तय की गई। इसमें यह निर्णय लिया गया कि सभी अधिवक्ता अपने ड्रेस कोड में रैली में शामिल होंगे। प्रदेश भर के प्रत्येक जिले और तहसील बार एसोसिएशन के प्रतिनिधि कल आयोजित होने वाली इस महारैली में शामिल होंगे।
सवंरा अनुसूचित जनजाति है या नहीं
तहसील कार्यालय में विवाद मामले में मुख्य प्रार्थी राम प्रसाद सिदार की जाति पर सवाल खड़े हुए हैं। ऐसे में अधिवक्ता संघ रायगढ़ की ओर से कलेक्टर एवं राज्य शासन को नोटिस जारी करते हुए रामप्रसाद को बर्खास्त करने एवं उस पर आपराधिक मामला दर्ज करने की मांग भी की गई है। अधिवक्ता संघ की ओर से राज्य शासन को नोटिस थमाते हुए इस मामले के कथित पीड़ित रामप्रसाद सिदार को बर्खास्त किए जाने सहित उस पर धारा 420 सहित अन्य धाराओं के तहत मामला पंजीबद्ध किए जाने की मांग की है, साथ ही यह मांग भी की गई है कि उसे तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाए।
इस संबंध में जो जानकारी सामने आ रही है उसके मुताबिक पूरे एपिसोड में शिकायतकर्ता रामप्रसाद सिदार की शिकायत पर 5 अधिवक्ताओं के ऊपर एट्रोसिटी एक्ट सहित अन्य कई धाराओं के तहत दिनांक 11/ 02/2022 को चक्रधर नगर थाने में मामला पंजीबद्ध किया गया था, लेकिन कथित पीड़ित को अनुसूचित जनजाति का नहीं होने की बात कहते हुए अधिवक्ता संघ की ओर से शिकायत किए जाने पर अब तक पुलिस और प्रशासन की ओर से की गई पूरी कार्यवाही पर सवाल खड़े हो गए हैं।
अधिवक्ता संघ की ओर से दी गई ये दलील
अधिवक्ता संघ की ओर से राज्य शासन को की गई शिकायत में यह कहा गया है कि अधिवक्ताओं के खिलाफ शिकायत करने वाला शिकायतकर्ता रामप्रसाद सिदार स्वयं को सवंरा बताते हुए खुद को अनुसूचित जनजाति का सदस्य बता रहा है और इसी आधार पर वह तहसील कार्यालय में लिपिक पद पर पदस्थ है। इसी जाति के आधार पर उसने अधिवक्ताओं पर एट्रोसिटी एक्ट के तहत भी मामला दर्ज करवाया है। अधिवक्ता संघ की ओर से यह दलील दी गई है कि माननीय उच्च न्यायालय द्वारा याचिका डब्ल्यूपीसी क्रमांक 644/ 219 कृष्णकांत वर्सेस यूनियन बैंक ऑफ इंडिया व अन्य के मामले में पारित निर्णय 06/12/ 2019 (डी.बी.) में सवंरा जाति को अनुसूचित जनजाति नहीं माना गया है, जिससे ज्ञात होता है कि रामप्रसाद सिदार अनुसूचित जनजाति का सदस्य नहीं है। जबकि रामप्रसाद स्वयं को अनुसूचित जनजाति का सदस्य बताते हुए गैर कानूनी तरीके से शासकीय नौकरी में कार्यरत है। ऐसे में राज्य शासन की ओर से उक्त व्यक्ति पर जिसने राज्य शासन को धोखा दिया है उसके विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की धारा 420 467, 468, 471 के तहत तत्काल एफ आई आर दर्ज कराया जाए साथ ही उसे तत्काल निलंबित किया जाए।
अधिवक्ता संघ ने दी यह चेतावनी
अधिवक्ता संघ रायगढ़ की ओर से शासन से रामप्रसाद सिदार के विरुद्ध तत्काल एफ आई आर कराने और उसे निलंबित किए जाने की मांग की है साथ ही यह चेतावनी भी दी है कि यदि 15 दिन के भीतर इस मामले में कार्यवाही नहीं की जाती है तो यह माना जाएगा कि कलेक्टर सहित छत्तीसगढ़ शासन के सचिव और मुख्यमंत्री एवं शासन प्रशासन के तमाम अधिकारी, नियुक्तिकर्ता और पदाधिकारी भी इस अवैध कृत्य एवं धोखाधड़ी करने वाले रामप्रसाद सिदार के साथ हैं । ऐसे में इन सभी को पार्टी बनाते हुए सक्षम न्यायालय में वैधानिक कार्यवाही की जाएगी।


