एसईसीएल प्रबंधक के खिलाफ फिर लामबंद हुए लात के ग्रामीण
धरमजयगढ़ विकासखंड के ग्राम लात के ग्रामीणों का रोजगार के मुद्दे पर एसईसीएल प्रबंधन व ग्रामीणों के बीच की खाई और गहरी होती नजर आ रही है। पुनर्वास नीति के तहत प्रभावित ग्रामीणों को तीन माह के भीतर रोजगार दिए जाने के संबंध में रायगढ़ कलेक्टर के आदेश पर छाल एसईसीएल प्रबंधन के द्वारा अब आदेश के पालन के बजाय उसका जवाब दिए जाने पर ग्रामीणों की नाराजगी बढ़ती जा रही है। इस संवेदनशील मुद्दे पर एसईसीएल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए प्रभावित ग्रामीणों ने एक बार फिर मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने पुनर्वास नीति का पालन कराए जाने को लेकर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा है साथ ही आगामी 24 जून को छाल ओपन कास्ट खदान में अनिश्चितकालीन हड़ताल करने की अनुमति मांगी है। ग्रामीणों द्वारा बीते 16 जून को कलेक्टर के नाम सौंपे गए ज्ञापन में एसईसीएल प्रबंधन पर कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं। ज्ञापन में कहा गया है कि कलेक्टर महोदय के द्वारा पुनर्वास नीति के तहत प्रभावित ग्रामीणों को 3 माह के भीतर रोजगार उपलब्ध कराने के आदेश पर एसईसीएल प्रबंधन द्वारा 16 बिंदुओं पर दिए गए जवाब में एमओयू, पंचनामा व पुनर्वास नीति के किसी भी शर्तों का पालन नहीं किये जाने की बात कही गई है। ज्ञापन में ग्रामीणों ने आरोप लगाते हुए कहा है कि प्रबंधन ने अपने जवाब में ऐसे सहमति पत्र का पालन करने की बात कही है जो किसी भी प्रशासकीय विभाग द्वारा अनुमोदित नहीं है और न ही नियमानुसार सत्यापित है। ग्रामीणों की ओर से प्रबंधन के द्वारा दिये गए जवाब के एक बिंदु पर गंभीर सवाल खड़े किये गए हैं, जिसके अनुसार एसईसीएल के महाप्रबंधक ने कहा है कि 'थाना प्रभारी, कलेक्टर से बड़े अधिकारी हैं और थाना प्रभारी के सहमति पत्र को कलेक्टर के आदेश से बड़ा मानते हैं।' इसके अलावा ज्ञापन में इस बात का उल्लेख किया गया है कि प्रबंधन पर हाइकोर्ट में दिए गए जवाब को दोहराते हुए फिर उसी जवाब को कलेक्टर को प्रस्तुत किया गया है जबकि ग्रामीणों के अनुसार हाइकोर्ट ने उनके पक्ष में फैसला देते हुए प्रबंधन को 45 दिन के भीतर रोजगार मुहैया कराने के आदेश दिये थे। ग्रामीणों ने कहा कि प्रबंधन के इस रवैये से हमारे सामने रोजगार का संकट यथावत बना हुआ है जिसके कारण हम अनिश्चितकालीन हड़ताल व धरना प्रदर्शन करने के लिए बाध्य हैं। उन्होंने कहा है कि आगामी 24 जून को प्रभावित ग्रामीणों के द्वारा अपनी मांगों को लेकर किये जाने वाले आंदोलन के कारण कोयले के उत्पादन व खदान की अन्य गतिविधियों के प्रभावित होने की समस्त जिम्मेदारी एसईसीएल प्रबंधन व स्थानीय प्रशासन की होगी। इसके साथ ही उन्होंने कलेक्टर के आदेश के पालन के बजाय उस पर प्रबंधन के द्वारा जवाब दिये जाने को गंभीर अपराध बताते हुए दंडात्मक कार्रवाई किये जाने की मांग की है। बता दें कि छाल एसईसीएल क्षेत्र के पुनर्वास ग्राम लात के सैकड़ों ग्रामीण रोजगार की मांग को लेकर लंबे समय से संघर्षरत हैं। वहीं इस मामले पर वर्तमान परिस्थितियां एसईसीएल प्रबंधन व प्रभावित ग्रामीणों के बीच की दूरियां और बढ़ाने का काम कर रही हैं।


