राष्ट्रपति चुनाव में छत्तीसगढ़ में पूरा विपक्ष राष्ट्रीय जनतांत्रित गठबंधन (एनडीए) की उम्मीदवार द्रोपदी मुर्मू के पक्ष में वोट करेगा। छत्तीसगढ़ में विधानसभा में भाजपा, जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जकांछ) और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) विपक्ष में हैं। जकांछ अध्यक्ष अमित जोगी पहले ही मुर्मू के पक्ष में मतदान करने का फैसला कर चुके हैं। बसपा के राष्ट्रीय नेतृत्व ने भी मुर्मू का समर्थन किया है। प्रदेश में बसपा विधायक दल के नेता केशव चंद्रा ने कहा कि राष्ट्रीय नेतृत्व ने जो फैसला किया है हम उसके हिसाब से मुर्मू के पक्ष में मतदान करेंगे।
छत्तीसगढ़ में विपक्षी पार्टियों के मुर्मू के पक्ष में आने से राज्य के 19 विधायकों का वोट उन्हें मिलना तय हो गया है। प्रदेश की 90 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा के 14, बसपा के दो और जकांछ के तीन सदस्य हैं। बाकी 71 सदस्य सत्तारुढ़ कांग्रेस पार्टी के हैं। राज्य के प्रत्येक विधायक के मत की वैल्यू (कीमत) 129 है। इस लिहाज से मुर्मू के पक्ष में कुल 2451 मत पड़ेंगे।
इसके साथ ही यहां भाजपा के नौ सांसद व दो राज्यसभा सदस्य भी हैं। वहीं, कांग्रेस के दो सांसद और तीन राज्यसभा सदस्य हैं। बता दें कि राष्ट्रपति का चुनाव देश की जनता अप्रत्यक्ष रूप से अपने निर्वाचित (सांसद व विधायक) जनप्रतिनिधियों के माध्यम से करती है। आबादी के हिसाब से सांसद और विधायक के वोट की वैल्यू (कीमत) तय की जाती है।
राज्य बनने के बाद राष्ट्रपति चुनाव
छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद पहली बार 2002 में राष्ट्रपति चुनाव हुआ। तब डा. एपीजे अब्दुल कलाम एनडीए के प्रत्याशी थे और वे निर्विरोध चुने गए थे। इसके बाद 2007, 2012, और 2017 में चुनाव हुए। इस दौरान प्रदे भाजपा सत्ता में थी। इसमें 2007 और 2012 में यूपीए प्रत्याशी क्रमशः प्रतिभा पाटिल व प्रणव मुखर्जी चुने गए थे।
ऐसे तय होती है वोटों की कीमत
किसी भी राज्य के जनप्रतिनिधियों के वोट की कीमत वहां की 1971 की जनसंख्या के आधार पर तय होती है। उदाहरण के तौर पर एक राज्य में विधायकों की संख्या 90 है और जनसंख्या 1971 में दो करोड़ 55 लाख रही तो जनसंख्या को 90 से भाग दिया जाएगा। इसका जो परिणाम आएगा उसे एक हजार से भाग दिया जाएगा। इसके बाद जो आंकड़ा आएगा वही वोट की कीमत होगी।


