अधिकारी ऐसे रहते हैं गायब जैसे गधे के सर से सिंग,काम काज पड़ा है ठप्प,कलेक्टर का दौरा होने पर ही आते हैं नजर!
असलम खान धरमजयगढ़:- शासन द्वारा आदिवासियों के हितों एवम विशेष पिछड़ी जनजातियों के उत्थान के लिए स्थापित की गई,परियोजना कार्यालय लंबे अरसे से भगवान भरोसे चल रहा है।यहां के अधिकारी कार्यालय से ऐसे गायब रहते हैं,जैसे की गधे के सर से सिंग गायब रहता है।
बता दें परियोजना प्रशासक एकीकृत आदिवासी विकास धरमजयगढ़ मे परियोजना प्रशासक पद पर विगत तकरीबन छः वर्षों से किसी भी अधिकारी का नियमित रूप से पद स्थापना नही होने से कार्यालय अधिकारी विहीन हो गया है।और यहां काम काज ठप्प चल रहा है।वर्तमान में परियोजना कार्यालय का प्रभार किसी अविनाश श्रीवास नामक व्यक्ति के पास है,जो की सहायक आयुक्त आदिवासी विकास रायगढ़ की कुर्सी पर भी बैठे हैं,जो यदा कदा ही कलेक्टर साहब का धरमजयगढ़ दौरा होने पर ही यहां नजर आते हैं।जिसको लेकर स्थानीय जन प्रतिनिधियों व आदिवासी समाज में भारी आक्रोश है।
स्थानीय समाजसेवी व वरिष्ठ पत्रकार असलम खान द्वारा परियोजना कार्यालय में सरकारी योजना की जानकारी हेतु कई बार संपर्क किया गया लेकिन संबंधित अधिकारी नदारत पाए गए,दूरभाष पर भी उनसे संपर्क नही हो पाया।वहीं कार्यालय के अन्य कर्मचारी स्टाफ से पूछने पर बताया गया की साहब यहां झांकने तक नही आते,उन्हें आवश्यकता पड़ने पर ऑफिस के कर्मचारी को रायगढ़ बुलाया जाता है।
विदित हो की धरमजयगढ़ परियोजना कार्यालय पूरे छत्तीसगढ़ राज्य का सबसे बड़ा परियोजना कार्यालय है,लेकिन बड़ी विडंबना की बात है के,यह अधिकारी विहीन है।इसका खामियाजा अंचल के आदिवासी सहित विशेष पिछड़ी जनजाति के लोगों को भुगतना पड़ रहा है।उनके विकास के लिए बनाए गए सरकारी महत्वपूर्ण योजना का लाभ नहीं उठा पा रहे हैं।आदिवासी विकास विभाग द्वारा संचालित अनेक विशेष योजनाओं का सही क्रियान्वयन सुचारू रूप से संचालन नही हो पा रहा।जमीनी स्तर पर काम काज शून्य प्रतीत हो रहा है,जिसको लेकर तत्कालिक कलेक्टर भीम सिंह द्वारा अप्रसन्नता व्यक्त की गई थी।लेकिन इतना सब होने के बावजूद भी यहां नियमित अधिकारी का पद स्थापना नही होना शासन प्रशासन पर सवालिया निशान खड़ा करता है।सत्ता का अमूल चूल परिवर्तन होने के पीछे कुछ इस प्रकार के कारण भी होते हैं।

