जिम्मेदारों की शह या जिम्मेदारों को नहीं परवाह?
खरसिया। जिलेभर में और खासतौर पर खरसिया विधानसभा क्षेत्र में शराब कोंचियों की बाढ़ इस कदर आ चुकी है, कि मौसम विभाग के अनुसार कहें तो पानी खतरे के निशान से ऊपर बह रहा है। बावजूद ना तो आबकारी विभाग और ना ही प्रशासन द्वारा कोई ठोस कदम उठाया जा रहा। वहीं ताज्जुब की बात यह भी है कि यदा-कदा जब विभाग को अपनी खानापूर्ति करनी होती है, तो यह कोंचिए पकड़े भी जाते हैं, ऐसे में कोई नेतानुमा व्यक्ति ही इन्हें छुड़ाने या फिर पकड़े गए 80-90 लीटर को 14 से 20 लीटर बनवाने के लिए थाने पहुंच जाता है। हाल ही में एक ऐसा किस्सा खरसिया में देखा गया कि ग्यारह जरक़िन और अन्याय बर्तनों की फोटो तो प्रकाशित की गई, परन्तु मात्र 20 लीटर वह भी 5 अलग-अलग लोगों के नाम केश बनाया गया, ताकि नेता की बात भी रह जाए और खानापूर्ति भी हो जाए।
ऐसे में यह अनुमान लगाना वाजिब होगा कि यह सब खेला जिम्मेदारों की देखरेख में हो रहा है। यदि नहीं, तो यह सब किसकी शह पर हो रहा है? खरसिया विधानसभा का शायद ही ऐसा कोई गांव होगा जहां अवैध शराब ना बन रही हो। महुआपाली, अंजोरीपाली, पुरानी बस्ती, तेलीकोट, छोटे डूमरपाली, बरगढ़ ऐसे कितने नाम गिनाएं। सही मायने में जांच की जाए तो पता चलेगा कि खरसिया क्षेत्र तो शराब का हब बन चुका है। गांव-गांव में आधी रात को 1:00 से 1:30 तक जगह-जगह शराब दुकानें खुली रहती हैं, वहीं अल सुबह 3 बजे से पुनः बिक्री शुरू हो जाती है।
अंग्रेजी वाले देते हैं घर पहुंच सेवा
नगर ही नहीं एनएच-49 पर जगह-जगह बने ढाबों पर भी पीने वालों के लिए मनपसंद ब्रांड हर वक्त उपलब्ध रहता है। बताया जा रहा है कि रात 10:00 बजे के बाद अंग्रेजी दुकानों के मैनेजर ही गांव-गांव में अधिक रकम लेकर भारी मात्रा में शासकीय शराब की अवैध बिक्री किया करते हैं। यदि शराब दुकानों में लगे सीसीटीवी फुटेज को देखा जाए, तो दूध का दूध और पानी का पानी भी हो सकता है। हालांकि इसमें भी कुछ ना कुछ चालबाजी तो जरूर कर दी जाती होगी।


