सीहोर : मध्यप्रदेश के सीहोर जिले में सरकारी गेहूं खरीदी में जबरदस्त अनियमितताएं सामने आई हैं। यह चिंता का विषय है कि कुछ वेयरहाउस जिनका नाम पहले ही ब्लैकलिस्टेड हो चुका है, उन्हें फिर से उपार्जन केंद्र के रूप में सक्रिय किया गया है। जिला कलेक्टर के निर्देशों के बावजूद, जिला उपार्जन समिति की चुप्पी और बेहतर निगरानी की कमी पर सवाल उठ रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, भैरूंदा क्षेत्र के उपार्जन केंद्रों की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। इन तस्वीरों में स्पष्ट देखा जा सकता है कि सभी कट्टियों पर न तो किसानों का कोड है और न ही किसान के नाम का उल्लेख है। यह स्थिति यह सवाल उठाती है कि वेयरहाउस में जमा किया गया गेहूं किस किसान और समिति से संबंधित है।
सरकारी खरीदी के दौरान नियमों की अवहेलना की जा रही है। किसानों की उपज खंडित होने के बजाय, संचालक नियमों को ताक पर रखकर अपने वेयरहाउस भरने में लगे हुए हैं। किसानों ने शिकायत की है कि कुछ जगहों पर कट्टियों के टैग पर जरूरी जानकारी नहीं दी जा रही है, जिससे यह समझना मुश्किल हो गया है कि सही उपज किसकी है।
इसी संदर्भ में, जिला उपार्जन समिति के सदस्यों ने अब तक उपार्जन केंद्रों का निरीक्षण नहीं किया है, जिससे संचालकों का हौसला और बढ़ गया है। इससे ये आरोप लगते हैं कि जिला कलेक्टर के निर्देशों की अवहेलना की जा रही है।
किसानों ने अपनी समस्याओं को लेकर भी आवाज उठाई है। कई किसानों का कहना है कि उन्होंने उपार्जन केंद्रों पर गेहूं बेचने के बाद भी, 14 दिन बीत जाने के बाद भी उनके खातों में भुगतान नहीं किया गया है। उन्हें कृषि यंत्रों, बीज, दवाओं, और पारिवारिक कार्यक्रमों के लिए पैसों की आवश्यकता है। खासकर वर्तमान में शादी-विवाह के मुहूर्त भी आ रहे हैं, जिसके कारण उन्हें और अधिक पैसों की आवश्यकता पड़ रही है।
यदि जल्द ही इस पर ध्यान नहीं दिया गया, तो यह अनियमितता किसानों के लिए गंभीर आर्थिक संकट का कारण बन सकती है। प्रशासन को इस मुद्दे पर तत्काल नजर रखने की आवश्यकता है, ताकि किसानों के अधिकारों और सरकारी नियमों का पालन सुनिश्चित किया जा सके।


