पाँच दिनों से लापता व्यक्ति की कुंए में मिली
लाश , हत्या कर कुएँ में लाश फेंकने की आशंका
उदयपुर। सरगुजा जिले के उदयपुर थाना क्षेत्र के ग्राम कवलगिरी में एक व्यक्ति की अज्ञात लोगों ने हत्याकर लाश को कुआ में फेंक दिया। मृतक धोबी राम कंवर 54 वर्ष पाँच दिनों से लापता था। पुलिस ने शव को कुँआ से बाहर निकलवाकर पोस्टमार्टम कराया और मौके पर फारेंसिक टीम व खोजी कुत्ते का सहारा लिया गया। हत्या के अंधे कत्ल की गुत्थी सुलझाने पुलिस जांच में जुटी है।
घटना के बारे में पुलिस ने बताया कि मृतक पांच फरवरी की शाम खाना खाकर सोया था, सुबह उसकी बेटी व बेटा देखें तो घर में नहीं था। पडोसी गांव का एक आदमी जमीन नापने के दौरान पंचनामा के लिए बुलाने आया तो मृतक के बेटे उपेंद्र उसे खोजने लगा, दो दिन तक पता नहीं चला तो आठ फरवरी को थाना में सूचना दी गई। वहीं नौ फरवरी को कवलगिरी निवासी महिला नीरा बाई के खेत में बने कुआँ में उसकी लाश मिली. महिला ने ही लाश मिलने की खबर गांव में सरपंच को दी और पुलिस को इसकी जानकारी दी गई। इस पर पुलिस टीम मौके पर पहुंची। उसके शव को कुँआ से निकाला गया।
सिर में चोट के निशान थे। वहीं एक चप्पल कुआ में तैर रहा था तो दूसरा खेत में 15 मीटर दूर मिला, वहां एक गमछा भी पड़ा था और खून का धब्बा भी था। पुलिस हत्या मानकर जांच में जुट गई है। मृतक की पत्नी इस दुनिया में नहीं है,18 वर्षीय पुत्र उपेन्द्र और करीब 24 वर्षीया पुत्री सुधियानो उसके साथ रहते थे। और जिस महिला के कुआ में उसकी लाश मिली वह विधवा है।
मामले की जांच करने पहुंचे फोरेंसिक एक्सपर्ट एस.के.सिंह के अनुसार मृतक के सिर के पिछले हिस्से में धारदार हथियार के चोट हैं,खेत में भी जमीन पर और मृतक के गमछे में भी काफी मात्रा में रक्त नजर आ रहा है।चेहरे रगड़ खाकर छिला हुआ है,इससे लगता है कि उसे खेत में चोट पहुंचा कर घसीट कर कुएँ में डाला गया है,पोस्टमार्टम रिपोर्ट से और साफ पता चल पाएगा।
मामले की जांच में डॉग स्क्वायड की टीम की मदद ली जा रही है। घटना स्थल से शव को पोस्टमार्टम हेतु सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र उदयपुर रवाना किया गया। पोस्टमार्टम पश्चात शव को परिजनों को सौंप दिया गया । थाना प्रभारी अलरिक लकड़ा द्वारा ब्लाइंड मर्डर की गुत्थी सुलझाने हेतु उच्चाधिकारियों के मार्गदर्शन में प्रयास किया जा रहा है। इस दौरान उदयपुर थाना के सहायक उप निरीक्षक अजित मिश्रा, राजेन्द्र प्रताप सिंह, आरक्षक संजीव पाण्डेय, लाखन सिंह, सिकन्दर आलम तथा अन्य स्टॉफ सक्रिय रहे

