सर्वहारा वर्ग में है जिनकी स्वीकार्यता :- सुनील लेन्ध्रा
50 वे जन्मदिन पर विशेष
छःग के अंतिम छोर में बसे गांव लेन्ध्रा में श्री राधेश्याम अग्रवाल गोमती देवी के घर आंगन में आज के दिन गूंजी किलकारी प्रदेश स्तर के राजनैतिक सामाजिक व्यापारिक हलकों के लिए अनुपम मिशाल बन जाएगी l इसका भान किसी को न था l पाँच भाई बहनों में तीसरे क्रम के सुनील लेन्ध्रा ने अल्प समय मे ही अपनी सादगी, मिलनसारिता, सूचिता के जरिये सामाजिक व राजनैतिक स्वीकार्यता हासिल की है l प्रदेश स्तर पर उनके चाहने वालो लंबी फेहरिस्त है l दोनो ही दलों में उनकी ख्याति दल विशेष से नही बल्कि दिल से है l निरन्तरता के जरिये ऊंचाइयों में मौजूद कठिन लक्ष्य भी सहजता से हासिल किया जा सकता है यह मिथक स्थापित करने में सुनील लेन्ध्रा ने सफलता पाई l धरती में बैठे व्यक्ति को आसमान की ऊंचाई का एहसास न होने देना सुनील लेन्ध्रा। का नैसर्गिक गुण है l ऊंचाईयों में पहुंचने की प्रक्रिया सहज हो सकती है l लेकिन ऊंचाइयों में टिके रहने के लिए सुनील लेन्ध्रा की शालीनता विन्रमता ने नया मिथक स्थापित किया है l राजनीति,समाज या फिर आध्यत्मिक जीवन में .शक्ति व सामर्थ्य सदा वन्दनीय होते है l सामर्थ्य से संग्रहित ज्ञान धन साधन का उचित वितरण सुनील लेन्ध्रा समाज मे पृथक स्थापित करता है l आसमान जैसी ऊंचाईयां हासिल करने के बाद धरती में खड़े इंसान को भी सम्मान देने की परिपाटी सुनील लेन्ध्रा के व्यवहारिक जीवन मे शामिल है l जनहित के लिए जीने वाला व्यक्ति समाज मे वंदनीय माना जाता है l शक्ति व सामर्थ्य के जरिये लोगो के लिए मददगार भूमिका का निर्वहन करने वाले सुनील लेन्ध्रा की मिलनसारिता के कायल सभी है l धार्मिक सामाजिक कार्यो के उत्थान हेतु उनका उदार हृदय अविस्मरणीय है l व्यस्तम व्यापारिक गतिविधियों के साथ साथ आचार व्यवहार के दौरान उसूलो सिद्धांतो व एक ठोस चिंतन के साथ चलने वाले सुनील लेन्ध्रा की शख्सियत उन्हें भीड से अलग स्थापित करती है l

