कश्मकश भरी ज़िंदगी में चैन की नींद कहाँ !
जीवन के सफ़र में सुकून की कुछ साँसें कहाँ !!
रात में जल्दी सोता नहीं अब ये सारा जहाँ !
रात खुद ही थक हार कर अकेले सो जाती यहाँ !!
नींद आने के लिए किसी के पास अब सुकून कहाँ !
मख़मल के बिछौने भी अब खुद पर इतराते कहाँ !!
ज़रूरत बनकर रह गये संबंधों में अब वो बात कहाँ !
रिश्तों की तुरपाई दिल से अब कोई करता कहाँ !!
पाई पाई हिसाब की उधेड़बुन में लगे है सब यहाँ !
और ढूँढने निकले है ख़ुशियों के पल कहाँ कहाँ !!
मिलेगी क्या वो ऐसे इस तरह आस पास यहाँ वहाँ !
रूठ गये हमसे सुकून के पल बिखर गये यहाँ वहाँ !! …
……✍️ Sushma Patel


