जोगी परिवार फर्जी आदिवासी बनकर छत्तीसगढ़ के आदिवासियों के साथ छलावा किया है — बसपा जोन प्रभारी इन्नोसेंट कुजूर
विगत दिनो छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष अमित जोगी के रायगढ़ प्रवास पर थे और वे प्रेसवार्ता भी किये और उन्होंने पत्रकारों से चर्चा के दौरान कहा की 2018 के विधान सभा चुनाव में अपनी मजबूती बना चुके हैं ,यह बात सत्य है पर उन्होने यह बात छुपाये की वे 2018 के विधान सभा चुनाव में बहुजन समाज पार्टी के साथ गठबंधन कर चुनावी मैदान में उतरे थे जिसका उन्हें काफी लाभ मिला जो की आज भी बसपा के दो विधायक जनता कांग्रेस के साथ हैं बसपा व जनता कांग्रेस व छत्तीसगढ़ के मतदाताओं मिलकर स्व.अजित जोगी को पुनः मुख्यमंत्री के रूप मे देखना चाहते थे,पर आज परिस्थिति अलग है उस समय जोगी परिवार को आदिवासी समाज,आदिवासी मानता था,जब से वर्तमान कांग्रेस सरकार ने जोगी परिवार का जाति प्रमाण पत्र को फर्जी साबित कर उनके आदिवासी होने का दावा का पर्दाफाश कर बेनकाब किया हैं ,तब से जोगी परिवार आदिवासी श्रेणी में नही है ,आम जनता जान चुकी हैं कि जोगी परिवार आदिवासी नही है, आदिवासियों की बहुल्य क्षेत्रों में दौरा कर अपने आप को आदिवासी समाज के बताया उन्हेँ धोखा मे रख कर वोट हासिल किया, इस फर्जीवाड़े की बात भाजपा और कांग्रेस पहले से ही जानती थी अगर बसपा जोगी परिवार को फर्जी आदिवासी होने की बात जानती तो 2018 विधान सभा चुनाव में उसके साथ शायद कतई गंठबंधन नही करती पर मरवाही विधानसभा के उपचुनाव में जोगी परिवार के फर्जी आदिवासी होने का भेद खुल ही गया साथ ही पूरे छत्तीसगढ़ के लोगो को मालूम हो गया की जोगी परिवार आदिवासी समाज के नही है ,फर्जी आदिवासी प्रमाण पत्र बनवा कर आदिवासी बेल्ट मे चुनाव लड़ रहे थे, जो उनके कारनामे का खुलासा हो ही गया और वे मरवाही उप चुनाव नही लड़ सके वहीं 2018 विधानसभा सभा चुनाव में और 2019 लोकसभा चुनाव में जनता कांग्रेस बहुजन समाज पार्टी को धोखा दिया जंहा बसपा चुनाव लड़ रही थी वंहा जनता कांग्रेस ने अपने प्रत्याशी को निर्दलीय चुनाव लड़ाया,वहीं अमित जोगी ने पत्रकारों के सवाल का जबाब देते हुये काहा की पुराने कार्यकर्ता अपने रास्ते भटक गये है इसलिए वे नये नये लोगो को जोड़ रहे हैं उनके यह कथन का जबाब में बसपा के जोन प्रभारी इन्नोसेंट कुजूर ने काहा की जोगी परिवार का जाति मामले का खुलासा हुआ है ,तब से छत्तीसगढ़ के आदिवासी समाज उनसे दूरी बना लिये उन्हेँ आदिवासी समाज के मान रहे थे तब तक उनके पार्टी के कार्यकर्ता बने.रहे वही अन्य समाज के उनके कार्यकर्ता जिधर बंम उधर हम.की कहावत को साकार करते हुए वर्तमान छत्तीसगढ़ के भूपेश सरकार के साथ हाथ मिला लिए है, और बाकी लोग बहुजन समाज के हाथ थाम लिये है ,जनता कांग्रेस की जनाधार तब तक छत्तीसगढ़ में था तब तक वे आदिवासी समाज के जाने जाते थे, वर्त्तमान में जब से उनके आदिवासी न होने की बात खुलासा हुआ है ,उनके एक भी जनाधार नही है,क्योंकि वे छत्तीसगढ़ के आदिवासियों के साथ छल किये अब उन्हें आदिवासी समाज मजा चखायेगी,


