रायगढ़ –पुलिस मुख्यालय रायपुर द्वारा सहायक उपनिरीक्षक अनंत राम साहू के थाना पोड़ी पदस्थापना के दौरान सन 1992 को माह सितंबर में डॉक्टर एम.एन. आजम की फोटो अकारण खिंचवा कर नियम विरुद्ध कार्यवाही स्वेच्छाचारीता प्रदर्शित करना व डॉक्टर एम. एन . आजम को फोटोग्राफ में स्लेट पर असंगति व्यवहार करते हुए फोटो बोर्ड में फोटो चस्पाने व गैर जिम्मेदारी पूर्ण कृत्य पद का दुरुपयोग करने को बड़ा अपराध मानते हुए पुलिस विभाग ने सहायक उप निरीक्षक अनंत राम साहू को वर्ष 1992 के प्रकरण में 12 वर्ष पश्चात दिनांक 27 मई 2004 को एक वेतन वृद्धि में कमी की सजा असंचयी प्रभाव से दी गई!
उक्त सजा को विभाग द्वारा बड़ी सजा माना गया एवं सहायक उप निरीक्षक अनंतराम साहू को पदोन्नति से वंचित रखा गया!वहीं उप निरीक्षक बी.एस. निषाद जिला बिलासपुर को वर्ष 1998 में 1 वेतन वृद्धि में कमी की सजा दिनांक 09.04.1998 को दी गई उप निरीक्षक बीएस निषाद को डीजीपी रायपुर के द्वारा दिनांक 07.06.2001 को पदोन्नति आदेश जारी हुआ! जिसे अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक प्रशासन रायपुर द्वारा दिनांक 18.06. 2001को बी ,एस निषाद को दी गई सजा को छोटी सजा मानाऔर पदोन्नति प्रभावशील मानते हुए पदोन्नति पर रवानगी देने का आदेश पुलिस अधीक्षक बिलासपुर को दिया गया ! एसपी बिलासपुर द्वारा दिनांक 20.06.2001 को उप निरीक्षक बी.एस. निषाद को निरीक्षक पद पर पदोन्नति देकर पुलिस मुख्यालय रायपुर के लिए दिनांक 20.06.2001 से कार्यमुक्त किया गया ! बी.एस. निषाद निरीक्षक के पद पर दिनांक 04.06.2001 से 30.11.2018 तक कार्यरत रहे
यहां पर यह उल्लेखित है कि सहायक उप निरीक्षक अनंतराम साहू एवं बीएस निषाद दोनों की सजा एक समान थी फिर भी अनंत राम साहू की सजा को बड़ी सजा मानते हुए अनंत राम साहू को पदोन्नति से वंचित रखा गया एवं बीएस निषाद को पदोन्नति दी गई, पुलिस मुख्यालय रायपुर द्वारा सहायक उपनिरीक्षक अनंत राम साहू के थाना पोड़ी पदस्थापना के दौरान सन 1992 को माह सितंबर में डॉक्टर एम.एन. आजम की फोटो अकारण खिंचवा कर नियम विरुद्ध कार्यवाही स्वेच्छाचारीता प्रदर्शित करना व डॉक्टर एम. एन . आजम को फोटोग्राफ में स्लेट पर असंगति व्यवहार करते हुए फोटो बोर्ड में फोटो चस्पाने व गैर जिम्मेदारी पूर्ण कृत्य पद का दुरुपयोग करने को बड़ा अपराध मानते हुए पुलिस विभाग ने सहायक उप निरीक्षक अनंत राम साहू को वर्ष 1992 के प्रकरण में 12 वर्ष पश्चात दिनांक 27 मई 2004 को एक वेतन वृद्धि में कमी की सजा असंचयी प्रभाव से दी गई!
उक्त सजा को विभाग द्वारा बड़ी सजा माना गया एवं सहायक उप निरीक्षक अनंतराम साहू को पदोन्नति से वंचित रखा गया!वहीं उप निरीक्षक बी.एस. निषाद जिला बिलासपुर को वर्ष 1998 में 1 वेतन वृद्धि में कमी की सजा दिनांक 09.04.1998 को दी गई उप निरीक्षक बीएस निषाद को डीजीपी रायपुर के द्वारा दिनांक 07.06.2001 को पदोन्नति आदेश जारी हुआ! जिसे पुलिस प्रशासन रायपुर द्वारा दिनांक 18.06. 2001 से पदोन्नति प्रभावशील मानते हुए पदोन्नति देने का आदेश पुलिस अधीक्षक बिलासपुर को दिया गया ! एसपी बिलासपुर द्वारा दिनांक 20.06.2001 को उप निरीक्षक बी.एस. निषाद को निरीक्षक पद पर पदोन्नति देकर पुलिस मुख्यालय रायपुर के लिए दिनांक 20.06.2001 से कार्यमुक्त किया गया ! बी.एस. निषाद निरीक्षक के पद पर दिनांक 04.06.2001 से 30.11.2018 तक कार्यरत रहे,यहां पर यह उल्लेखित है कि सहायक उप निरीक्षक अनंतराम साहू एवं बीएस निषाद दोनों की सजा एक समान थी फिर भी अनंत राम साहू की सजा को बड़ी सजा मानते हुए अनंत राम साहू को पदोन्नति से वंचित रखा गया एवं बीएस निषाद को पदोन्नति दी गई,यैसे ही दो मामले में हाईकोर्ट ने असंचयी को छोटा सजा मानते हुए फैसला दिया है पढ़ें विस्तार से……
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने ‘असंचयी’ रूप से एक वेतनवृद्धि रोकने की सजा को बड़ी सजा मानने से किया इंकार
प्रधान आरक्षक को ASI पदोन्नति परीक्षा में बैठने की मिली अनुमति कोर्ट ने राज्य शासन और पुलिस विभाग को नोटिस जारी कर मांगा जवाब बिलासपुर, 22 सितंबर 2021। प्रधान आरक्षक ज्वाला प्रसाद हिंडोले अब सहायक उप निरीक्षक की पदोन्नति परीक्षा में बैठने के लिए बिलासपुर हाई कोर्ट ने अंतरिम राहत प्रदान की है। पुलिस विभाग ने उसे पिछले पांच साल में एक बड़ी सजा होने कोर्ट ने राज्य शासन और पुलिस विभाग को नोटिस जारी कर मांगा जवाब
बिलासपुर, 22 सितंबर 2021 प्रधान आरक्षक ज्वाला प्रसाद हिंडोले अब सहायक उप निरीक्षक की पदोन्नति परीक्षा में बैठने के लिए बिलासपुर हाई कोर्ट ने अंतरिम राहत प्रदान की है। पुलिस विभाग ने उसे पिछले पांच साल में एक बड़ी सजा होने का हवाला देकर परीक्षा के लिए अयोग्य घोषित कर दिया था। प्रकरण में याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अनादि शर्मा ने पैरवी की। कोर्ट ने राज्य सरकार और पुलिस विभाग को नोटिस जारी कर इस मामले में जवाब तलब भी किया है।
मामला इस प्रकार है कि 21 मई 2017 को लालपुर थाना, जिला मुंगेली में पदस्थ प्रधान आरक्षक ज्वाला प्रसाद हिंडोरे पर अपने अफसरों से अभद्र व्यवहार किये जाने के आरोपों के चलते पुलिस अधीक्षक मुंगेली के द्वारा याचिकाकर्ता की सेवा पुस्तिका में निंदा की सजा अंकित करने की कार्यवाही की गई थी। बाद में सजा को बढ़ाते हुए पुलिस अधीक्षक मुंगेली ने ‘आगामी एक वेतनवृद्धि एक वर्ष के लिए असंचयी प्रभाव से रोकने की सजा’ दी। पुलिस महानिरीक्षक बिलासपुर रेंज ने बाद में मामले को स्वतः संज्ञान में लेते हुए याचिकाकर्ता पर लागू हुई सजा में ‘दीर्घ शास्ति’ शब्द जोड़ दिया था। इस संबंध में याचिकाकर्ता के द्वारा पुलिस महानिदेशक, के समक्ष अपील प्रस्तुत की गई, लेकिन याचिकाकर्ता की अपील को निरस्त करते हुए पुलिस महानिदेशक ने पुलिस महानिरीक्षक के द्वारा याचिकाकर्ता को दंडस्वरूप दी गई सजा जो “‘दीर्घ शास्ति’ वेतन में एक वेतनवृद्धि के बराबर कमी एक वर्ष के लिए मात्र, असंचयी प्रभाव से” के फैसले को सही ठहराया था। इस दौरान कार्यालय पुलिस अधीक्षक मुंगेली द्वारा प्रधान आरक्षक से सहायक उप निरीक्षक पदोन्नति परीक्षा हेतु संयुक्त वरीयता क्रम सूची का प्रकाशन किया गया। जिसमें ज्वाला प्रसाद हिंडोरे को बड़ी सजा होने का हवाला देकर अयोग्य घोषित बताया गया। इसके विरुद्ध श्री हिंडोरे ने हाई कोर्ट अधिवक्ता अनादि शर्मा और नरेन्द्र मेहेर के माध्यम से याचिका दायर की। प्रकरण की सुनवाई 20 सितंबर को न्यायमूर्ति पी. सेम कोशी की अदालत में हुई। याचिका में याचिकाकर्ता के अधिवक्ता अनादि शर्मा द्वारा यह तर्क दिया गया कि वेतन में एक वेतनवृद्धि के बराबर कमी एक वर्ष के लिए मात्र, असंचयी प्रभाव से रोकने की सजा लघु शास्ति (छोटी सजा) की श्रेणी में आता है। तदोपरांत श्री शर्मा नें यह भी बताया की छोटी सजा में ‘दीर्घ शास्ति’ शब्द के जुड़ने मात्र से वह बड़ी सजा का प्रकार नहीं ले सकती और उपरोक्त बताई सजा को छोटी सजा के प्रारूप में रहने के कारण उसे बड़ी सजा के बराबर नहीं माना जा सकता।उपरोक्त तर्कों के आधार पर उच्च न्यायालय ने मामले में अपनी राय देते हुए राज्य शासन और पुलिस विभाग को नोटिस जारी कर उनका जवाब माँगा है। इसके साथ ही याचिकाकर्ता के भविष्य तथा मामले की गंभीरता को मद्देनज़र रखते हुए हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ता को सहायक उप निरीक्षक पदोन्नति परीक्षा में भाग लेने की अनुमति प्रदान करते हुए अंतरिम राहत दी है। अधिवक्ता अनादी शर्मा द्वारा लगाई गई याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति श्री पी. सेम कोशी की अदालत ने न्यायहित में संबंधित विभाग को यह भी आदेश दिया कि याचिकाकर्ता के सहायक उप निरीक्षक के पद पर उम्मीदवारी को बिलासपुर रेंज में ही चयन के लिए सोच-विचार करें। जिससे याचिकाकर्ता को मुंगेली जिले के लिए आयोजित परीक्षा के छूट जाने की स्थिति में बिलासपुर रेंज के लिए आयोजित हो रही परीक्षा में भाग लेने का अवसर प्राप्त हो सके। उपरोक्त आदेश के तारतम्य में पुलिस विभाग द्वारा माननीय हाई कोर्ट के आदेश के परिपालन में याचिकाकर्ता श्री हिंडोरे को बिलासपुर रेंज में आयोजित शारीरिक दक्षता परीक्षा में बैठने की अनुमति प्रदान की गई। उच्च न्यायालय सभी तर्कों और सबूतों के आधार पर मामले में अंतिम आदेश पारित करते समय याचिकाकर्ता की पदोन्नति के सम्बन्ध में भी अपना अंतिम फैसला सुनाएगी।
कर्मचारियों के निलंबन पर छत्तीसगढ हाईकोर्ट का अहम फैसला…संस्थानों और कर्मचारियों के लिए नजीर बनेगा ये आदेश
बिलासपुर, 15 जनवरी 2022 को उच्च न्यायालय ने फैसला दिया है कि छोटी सजा में निलंबन अवधि का वेतन भत्ता नही दिया जाता है तो वह दुगुनी सजा के रूप में माना जायेगा। याचिकाकर्ता मेघराज एनटीपीसी सीपत में कार्यरत था। उसके विरूद्व दो आरोप के साथ आरोप पत्र जारी किया गया एवं साथ में विभागीय जांच संस्थित करते हुए निलंबित कर दिया गया। विभागीय जांच के पश्चात् एक आरोप को सिद्व मानते हुए उसे लघु शस्ति एक वेतनवृद्वि असंचयी प्रभाव से रोकने की लघु शस्ति (छोटी सजा) दी गयी एवं साथ में यह आदेशित किया गया कि याचिकाकर्ता को निर्वाह भत्ता के अतिरिक्त वेतन एवं अन्य लाभ की पात्रता नहीं होगी, जिसके पश्चात् उसने उक्त आदेश को एकलपीठ के समक्ष चुनौती दी। इस पर सुनवाई पश्चात न्यायमूर्ति संजय के अग्रवाल की एकलपीठ ने निर्णय दिया कि याचिकाकर्ता को लघु शस्ति अधिरोपित की गयी है अतः स्थायी आदेश की कंडिका 29 के तहत् निलंबन अवधि का वेतन एवं अन्य लाभ से वंचित करने का आदेश गलत है। अतः याचिकाकर्ता को 9 प्रतिशत के ब्याज के साथ निलंबन अवधि का समस्त लाभ दिया जाये। उक्त आदेश के खिलाफ एनटीपीसी ने युगलपीठ के समक्ष एक रिट अपील प्रस्तुत किया कि स्थायी आदेश के तहत् उन्हें निलंबन अवधि के बारे में निर्णय लेने का अधिकार है, प्रारंभिक सुनवाई के पशचात एकलपीठ के आदेश पर रोक लगाते हुए मेघराज याचिकाकर्ता को नोटिस जारी किया गया, मेघराज की ओर से अधिवक्ता अजय श्रीवास्तव ने पक्ष रखते हुए बताया कि केंद्र सरकार ने एक परिपत्र जारी किया है कि यदि आरोप पत्र दीर्धशस्ति के लिए दिया जाये किंतु अंत में लघु शस्ति अधिरोपित की जाती है तो कर्मचारी निलंबन अवधि का संपूर्ण लाभ प्राप्त करने का अधिकारी है। दोनों पक्षों को सुनने के बाद मुख्य न्यायाधीश एवं न्यायमूर्ति एन,के, चंद्रवंशी की युगलपीठ ने निर्णित किया कि एक वेतन वृद्वि लघू शास्ति के साथ यदि निलंबन अवधि का वेतन रोका जाता है तो वह मूल सजा से बड़ी सजा हो जायेगी एवं इसी आधार पर केंद्र सरकार ने उक्त परिपत्र जारी किया है कि लघूशास्ति के मामले में निलंबन अवधि का संपूर्ण लाभ कर्मचारी को प्राप्त होगा अतः निलंबन अवधि का लाभ एकलपीठ का आदेश उचित है हालांकि न्यायालय ने कहा कि यदि 4 सप्ताह के अंदर एकलपीठ द्वारा आदेशित संपूर्ण लाभ दे दिया जाता है तो 9 प्रतिशत ब्याज देने से छूट रहेगा किंतु यदि 4 सप्ताह के अंदर संपूर्ण लाभ नहीं दिया जाता है तो याचिकाकर्ता को 9 प्रतिशत ब्याज प्राप्त करने का हकदार रहेगा। इन सभी फैसलों को देखते हुए ….
पुलिस मुख्यालय रायपुर द्वारा सहायक उपनिरीक्षक अनंत राम साहू थाना पोड़ी पदस्थापना के दौरान सन 1992 को माह सितंबर में डॉक्टर एम.एन. आजम की फोटो अकारण खिंचवा कर नियम विरुद्ध कार्यवाही स्वेच्छाचारीता प्रदर्शित करना व डॉक्टर एम. एन . आजम को फोटोग्राफ में स्लेट पर असंगति व्यवहार करते हुए फोटो बोर्ड में फोटो चस्पाने व गैर जिम्मेदारी पूर्ण कृत्य पद का दुरुपयोग करने को बड़ा अपराध मानते हुए पुलिस विभाग ने सहायक उप निरीक्षक अनंत राम साहू को वर्ष 1992 के प्रकरण में 12 वर्ष पश्चात दिनांक 27 मई 2004 को एक वेतन वृद्धि में कमी की सजा असंचयी प्रभाव से एक वर्ष के लिए दी गई! और
सजा को विभाग द्वारा बड़ी सजा माना गया ,एवं सहायक उप निरीक्षक अनंतराम साहू को पदोन्नति से वंचित रखा गया! वही बी .एस निषाद को पूर्व में ही समान
सजा होने के बावजूद उप निरीक्षक से निरीक्षक पद में पदोन्नति दे दी गयी एक प्रकार से देखा जाए तो सहायक उप निरीक्षक अंनतराम साहू के साथ पुलिस विभाग द्वारा पक्षपात किया काहा जा सकता हैं,

