कोरबा. विद्युत सुधार अधिनियम 2020 के अंतर्गत बिजली कंपनियों के निजीकरण की कोशिशें तेज हो गईं हैं। नए अधिनियम के तहत यूपी में बिजली कंपनी के निजीकरण के प्रयास शुरू होने के साथ ही अब देशभर के बिजली अधिकारी-कर्मचारी संगठनों ने फिर से विरोध के स्वर बुलंद करना शुरू कर दिया है। बिजली कंपनियों के निजीकरण को लेकर कई संगठन अब मिलकर इसका विरोध करने की तैयारी में भी जुटे हैं। बिजली क्षेत्र के जानकारों के अनुसार केंद्र ने इस संबंध में कई राज्यों को पिछले माह ही स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्युमेंट जारी कर दिया है। इसके बाद निजीकरण की कोशिशें भी तेज हो गई हैं। इसे लेकर देशभर के बिजली अधिकारी और कर्मचारियों में चिंता के साथ गुस्सा भी है और देशव्यापी आंदोलन की रणनीति भी बन रही है। स्थानीय बिजली संगठनों का भी कहना है कि बिजली कंपनियों के निजीकरण को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यूपी में जिस तरह से विरोध किया जा रहा है, वैसे ही मिलकर बिजली कर्मचारी यहां भी आंदोलन करेंगे।
निजीकरण व आउट सोर्सिंग पॉलिसी का विरोध करेंगे
भारतीय मजदूर संघ के प्रदेश महामंत्री राधेश्याम जायसवाल ने कहा कि यूपी में जिस तरह से निजीकरण की नीति का विरोध किया गया है, वैसा ही विरोध के लिए हम भी तैयार हैं। बिजली कंपनी में आउट सोर्सिंग पॉलिसी को लेकर आने वाले दिनों में हमार संगठन आंदोलन करेगा। इसका निर्णय किया गया है।
संगठनों को निजीकरण का विरोध करना चाहिए: चेट्टी
बिजली कर्मचारी संघ फेडरेशन-01 के प्रदेश महामंत्री आरसी चेट्टी ने कहा कि केंद्र बिजली सुधार अधिनियम 2020 लागू करने लगातार राज्यों पर दबाव डाल रही है। भाजपा शासित राज्यों में निजीकरण की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। सरकार को कृषि बिल की तरह बिजली संशोधन विधेयक का विरोध करना चाहिए। वहीं सभी कर्मचारी-अधिकारी संगठनों को एकजुट होकर निजीकरण की नीति का विरोध करना चाहिए।
विद्युत सुधार अधिनियम 2020 लागू करने की तैयारी में केंद्र
केंद्र सरकार विद्युत सुधार अधिनियम 2020 लागू करने की दिशा में आगे बढ़ गई है। बिजली क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि कई राज्यों को स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्युमेंट भी भेजा गया है। इसमें निजीकरण की प्रक्रिया के क्या करना है उन बातों और नियमों को शामिल किया गया है। कांग्रेस शासित राज्यों ने बिजली संशोधन अधिनियम को लेकर पहले ही कई सवाल उठाए हैं।
निजीकरण होने पर परेशानी बढ़ जाएगी
बिजली कंपनियों के निजीकरण का रास्ता साफ होने पर पावर सेक्टर के अभियंता और कर्मचारियों की परेशानी भी बढ़ जाएगी। वितरण क्षेत्र में निजी करण की दशा में कर्मचारियों में यह भी आशंका है कि वह निजीकरण के साथ निजी कंपनी के कर्मचारी भी बना दिए जाएंगे। हालांकि पांचों कंपनियों में प्रदेश में बिजली कर्मचारी और अधिकारियों की संख्या 15 हजार तक है। निजीकरण की दशा में उपभोक्ताओं पर भी इसका व्यापक असर पड़ेगा। क्योंकि निजीकरण होने की दशा में उपभोक्ताओं को निजी कंपनियों से बिजली खरीदने की मजबूरी रहेगी।


