▪️ वटवृक्ष की परिक्रमा कर सुखी दांपत्य की मांगी मुराद
खरसिया। जेष्ठ कृष्णपक्ष अमावस्या के दिन ही सती सावित्री ने सत्यवान को यमराज के मुख से वापस लाया था। इसी परंपरा का निर्वहन करते हुए सभी सुहागिन महिलाएं आज के दिन वटसावित्री व्रत करती हैं।
अंचल में लाखों महिलाओं ने इस वट सावित्री व्रत का पूजन कर अपने सुखी दांपत्य जीवन की मुरादें मांगी हैं। दिन प्रतिदिन इस व्रत का महत्व समझते हुए आदिवासी क्षेत्र में भी आधिकाधिक रूप से अपने पति की लंबी उम्र के लिए इस व्रत का निर्वहन किया जाता है। यह उपवास एवं पूजन पौराणिक मान्यताओं पर आधारित है। पूजन से 1 दिन पूर्व रविवार को बाजार में पूजन सामग्री खरीदने के लिए काफी गहमागहमी रही। वहीं सोमवार को अमावस्या के दिन सभी ने पूरी भक्ति भावना के साथ यह व्रत तथा पूजन किया। अपने अखंड सौभाग्य और सुखी दांपत्य जीवन की कामना को लेकर अंचल की लाखों महिलाओं ने वटवृक्ष की 108 परिक्रमा कर सूत के धागे से के धागे से फेरी लगाते हुए अपने मनोकामनाएं मांगी हैं। वट वृक्ष को भगवान ब्रह्मा एवं विष्णु तथा महेश का प्रतीक माना जाता है। इसीलिए इसके नीचे बैठकर व्रत कथा आदि सुनने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।


