आग लगें गजमार पहाड़ में वन विभाग रहे अपने आफिस में मस्ती में
रायगढ़। रायगढ़ वन मंडल के तहत शहर से लगे गजमार पहाड़ी में आग लग गयी की लगायी गई इसकी खबर वन विभाग को नहीं वही लोगों का कहना है प्रत्येक वर्ष के गर्मी माह में आग लग जाती है वन विभाग को मालूम भी है उसके बाद भी कोई तैयारी नहीं करती समय पर सुखे पत्तों को हटा देती तो आग जो लगी हैं नही लगती न ही कोई विट गार्ड तैनात करती है वन विभाग के ऊपर कार्यवाही होनी चाहिए जब तक कड़ी कार्रवाई नहीं करी गई तब तक आग लगने की सिलसिला जारी रहेगी खबर बन जाती है अधिकारी बेखबर रह जाती है । जंगल में आग धू धु कर जल रही है। वन विभाग के अधिकारी एसी के ठंडक गद्देदार मखमली चादर ओढ़ कर आराम कर रहे हैं , जिसे बचाने के लिए उन्हें लाखों रुपए तनख्वाह मिलती है लोगों को बचाने के लिए शुद्ध हवा देती है वह जंगल के पेड़ पौधे जिन्दा जल रही है उसे बचाने के लिए कुछ अफसर भेज दिये है सवाल तो यह है जूते मोजे टिप टाप पहन कर ड्रेस कैसे जंगल बुझा सकते हैं , वे अफसर भी लोगों के सुचना से मौके पर पहुंचे हैं उनके स्थल पर पहुंचते- पहुंचते आधा जंगल जल कर राख में तब्दील हो चूका, लोगों ने यह भी बताया सुचना पाकर कुछ अधिकारी आग बुझाने मौके पर आये तो सही पर जंगल अंदर धू धू कर जल रहे जंगल पर घुसने में सौ हजार बार सोचने में लगे थे उन्हें तो घर कर चुल्हा बुझाने कि हिम्मत नहीं होती ओ किया जंगल पर लगे आग को बुझा पायेंगे,उनके साथ कुछ छोटे कर्मचारी भी आये थे वे भी जंगल अंदर आग बुझाने घुसने कि हिम्मत नहीं कर रहे थे पर अपने अधिकारी कि डर से मजबुरन जंगल अंदर तो घुस गये, और लंबे -लंबे पेड़ के टहने काट लिये और दूर से जल रहे आग को पिट रहे थे जिससे आग कि जलने कि गति और तेज हो रही थी,वनकर्मी बड़ बड़ा रहे थे कोई शरारती सिगरेट पीकर फेंक दिया होगा जिसके चलते आग लग गयी अभी आग लगने का मौसम नही है पर ये नहीं कह रहे थे दो चार विट गार्ड तैनात रहते तो आग नहीं लगती और जल्द आग बुझाने कि दावा कर रहे थे,वही आग लगने से जमीन पर रेंगने वालो जीवो की क्षति से इनकार नही किया जा सकता । वन विभाग दावा तो कर रही है आग बुझाने की वृक्षों को क्षति नही पहुचने की लेकिन आग लग जाने के बाद क्षति न हो ,यह बात लोगों को हजम नहीं हो रही हैं, खैर एक कहावत को वन विभाग साकार कर रही है “आग लगे जंगल में वे रहे मस्ती में “

