छत्तीसगढ़ की 14 संस्थाओं और आश्रमों में 2200 से ज्यादा अनाथ बच्चे है, जिन्हें माता-पिता का इंतजार हैं। इन्हें गोद लेने के लिए 723 लोगों ने प्रदेश से ही आवेदन कर रखा है, देश-विदेश के आवेदन भी बड़ी संख्या में हैं, लेकिन गोद देने की प्रक्रिया इतनी पेचीदा है कि राज्य की जिम्मेदार एजेंसी इनमें से केवल 97 बच्चों को ही गोद दे सकती है।
एडॉप्शन की प्रक्रिया इतनी जटिल है कि गोद लेने वाले माता-पिता को अपने नंबर के लिए वर्षों इंतजार करना पड़ रहा है। नंबर आने पर संबंधित अभिभावक को यह विकल्प ही नहीं मिलता कि लड़का मिलेगा या लड़की, क्योंकि उस नंबर पर जो बच्चा है, उसे ही गोद देने का नियम है। अगर किसी कारण से अभिभावक इस मौके को छोड़ते हैं तो उनका नंबर नए सिरे से लगता है। छत्तीसगढ़ में ही ऐसे कई मामले हैं, जिनमें अभिभावक गोद का आवेदन देकर 5-5 साल से इंतजार कर रहे हैं, पर उन्हें बच्चा नहीं मिला।
केस 1 – खरीद-फरोख्त में फंसा प्रोसेस
एक सामाजिक कार्यकर्ता ने बताया कि कोलकाता के रहने वाले प्रोफेसर दंपत्ति ने बालिका गोद लेने के लिए कारा में अर्जी दी। उन्हें 12 साल की नाबालिग से जन्मी बच्ची मिली। लेकिन कारा के अफसरों ने ये कहकर बच्ची को गोद देने से मना किया कि खरीद-फरोख्त की आशंका है।
केस 2 – आवेदन के 3 साल, अब भी इंतजार
राजधानी के टिकरापारा के रहने वाले एक दंपत्ति ने बताया कि कारा के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन किए हुए तीन साल हो गए हैं। उन्हें 4 वर्ष का बच्चा चाहिए। दो बार काउंसलिंग हो चुकी, लेकिन अभी तक बच्चा नहीं मिला है। कारण पूछने पर कहते है कि आवेदन कारा के पास है।
इन दस्तावेजों की जरूरत
भारतीय भावी माता-पिता के लिए पैन कार्ड, निवास प्रमाण पत्र, पिछले वर्ष की आय का प्रमाण पत्र, विवाह प्रमाण पत्र, फोटो, विवाह-विच्छेद, पति या पत्नी की मृत्यु की स्थिति में मृत्यु प्रमाण पत्र, जन्म प्रमाण पत्र, डॉक्टर का प्रमाण पत्र कि उन्हें संक्रमक या घातक रोग नहीं है, देना जरूरी है। सिंगल महिला या पुरुष के मामले में उनके किसी संबंधी से वचन-पत्र देना होता है कि हादसे में वे नहीं रहे तो बच्चे की देखरेख वही संबंधी करेंगे।
नियम जिनमें से किसी न किसी में फंसता है मामला
- भावी अभिभावकों को शारीरिक, मानसिक और वित्तीय रूप से सक्षम तथा सुदृढ़ होना चाहिए।
- उन्हें जानलेवा बीमारी नहीं होनी चाहिए। 3 या 3 से अधिक संतान वाले दंपत्ति नहीं होने चाहिए।
- सिंगल महिला लड़का, लड़की में से किसी को भी गोद ले सकती है। अकेले पुरुष सिर्फ लड़के को।
- 4 साल के बच्चे के लिए पैरेंट्स 45 वर्ष, 8 वर्ष के लिए 50, 18 वर्ष के लिए 55 वर्ष से अधिक हों।
- बालक व भावी दत्तक माता-पिता दोनों में से प्रत्येक की आयु में 25 वर्ष से अधिक अंतर होना चाहिए।
- देश ही नहीं विदेश से मिल रहे आवेदन
- बच्चों के लिए छत्तीसगढ़ ही नहीं, अमेरिका, कनाडा, न्यूजीलैंड, सऊदी अरब और ऑस्टेलिया समेत कई देशों से आवेदन मिले हैं। कानूनी प्रक्रिया लंबी है, बच्चों को किसी को भी नहीं सौंप सकते। एडॉप्शन से पहले केंद्र सरकार को भी सूचित करना होता है। -नवनीत स्वर्णकार, अधिकारी-बाल संरक्षण परियोजना


