रायगढ़. सरिया के कांदुरपाली गांव के एक स्व सहायता समूह की महिलाएं चर्चा में हैं। गांव में जहां महिलाओं का समूह बड़ी, पापड़, अचार, बांस के बर्तन, दोना, पत्तल समेत पारंपरिक सामान बनाता है वहीं इन लोगों ने बाजार की डिमांड को देखते हुए चाउमीन बनाना शुरू किया। आइडिया आया तो जानकारी जुटाई, मशीन खरीदी, प्रशिक्षण लिया और अब कारोबार चमक गया है। लॉकडाउन और अनलॉक के बीच भी समूह की महिलाओं ने पौने तीन लाख रुपए का चाउमीन तैयार कर बेचा है। कांदुरपाली में सहोदरा पटेल एमए पास हैं। उन्होंने गांव की कुछ महिलाओं को जोड़कर जुगनू महिला स्व सहायता समूह बनाया। सचिव विमला चौहान दसवीं पास हैं। समूह में कुल 10 सदस्य हैं। फरवरी 2019 में सहोदरा और विमला की पहल पर बने इस समूह ने शुरुआत में पारंपरिक छत्तीसगढ़ सामान और वनोपज से तैयार उत्पाद बेचे। इसके बाद बैठक में महिलाओं ने तय किया कि कुछ नया करें जिससे न आय बढ़े बल्कि दूसरों को भी नया कुछ करने का आइडिया मिले। पांच लाख के कारोबार की तैयारी लॉकडाउन ने लगाया ब्रेक- समिति की अध्यक्ष सहोदरा बताती हैं कि हर जगह मिलने वाले सामान बनाने का मतलब नहीं था इसलिए चाउमीन बनाना तय किया था। समूह की महिलाओं ने गांव, कस्बों में दुकान, ठेलों की लिस्ट बनाई। पांच लाख रुपए के चाउमीन बनाने और खुद हर जगह बेचने की योजना बनाई। जनवरी में काम शुरू किया। शुरुआत में उत्पादन कम था लेकिन फरवरी से मार्च में लॉकडाउन लगने तक और फिर अगस्त से बाजार खुलने के बाद अब तक दो लाख 74 हजार 950 रुपए की बिक्री हुई है। लगभग 40 हजार रुपए कमाए हैं। अचानक लॉकडाउन से नुकसान हुआ अगर सबकुछ सामान्य होता तो 6 महीने में 5 लाख रुपए का चाउमिन बेचते।
ठेलों में भीड़ दिखी तो आया आइडिया
विमला कहती हैं पहले गांव और शहरों में सड़क किनारे ठेलों में चाट और मुर्रा बिकता था। अब सरिया, बरमकेला या रायगढ़ की सड़कों के किनारे या चौराहों पर ठेलों में चाउमीन और फास्ट फूड बिकता है। इसके साथ ही गांव के घरो में भी बच्चे और युवा चाउमीन खाते हैं। यह देखकर कुछ दुकानदारों से हमने जानकारी ली । बैठक में सभी ने तय किया कि हम बड़ी, अचार नहीं बल्कि चाउमीन बनाएंगे। इसके बाद कुछ जानकारों से मदद लेकर यू-ट्यूब पर बनाने की विधि ढूंढी। दिसंबर 2019 में बिहान की सूक्ष्म ऋण योजना से 60 हजार का लोन लिया। 15 हजार सब्सिडी मिली और एक लाख रुपए का बैंक लोन भी लिया। लगभग डेढ़ लाख रुपए में कोलकाता से मशीन मंगवाई। ओडिशा से एक कारीगर बुलवाया जिसने चाउमिन बनाने की ट्रेनिंग दी।


