पत्थलगांव। पशुपालकों को ग्रामीण इलाकों में खासकर पशु चिकित्सा की कमी का अभाव के चलते पशुपालको को जानकारी नहीं मिल पाती है जिससे समय पर पशुओं की इलाज या दवा उपलब्ध नहीं कराने पर बीमारी बढ़ जाती है और पेट के कीड़ें(कृमिनाशन) की दवा नहीं देते है, जिससे पशु का स्वास्थ्य तो कमजोर होता ही है साथ ही पशुपालको को आर्थिक नुकसान भी होता है। पशुओं में खुरहा चपका कृमि अभियान के तहत घर घर जाकर पत्थलगांव पशुपालन विभाग के बोधराम सक्सेना के अगुवाई में पशुओ को कृमि की दवा पिलाई जा रही है। कुछ दिनों पश्चात टिकाकरण का महाअभियान शुरू किया जाएगा। पशुपालकों ने सरकार के इस अभियान का आभार जताया विदित हो कि यह अभियान पूरे भारत मे चलेगा जिससे पूरे देश में खुरहा चपका जैसी गंभीर बीमारी सै मुक्त हो सकेगा। चिकित्सक बोधराम सक्सेना ने बताया कि पशुओं के पेट में कीड़े एक बड़ी समस्या है। अगर पशुपालक अपने पशुओं को हर तीन महीने मैं पेट के कीड़ें की दवा दें तो पशुपालक के लिए पशुपालन और भी लाभदायक होगा। उन्होने बताया,”अगर पशु के पेट में कीड़ें है तो उसको जो खिलाया जाता है उसका 30 से 40 प्रतिशत हिस्सा कीड़ें खा जाते है। अगर दवा देते है तो इस 30-40 प्रतिशत होने वाले नुकसान को बढ़ाया जा सकता है। पशु स्वस्थ्य तभी होता है जब उसका पेट सही होता है पशु जो भी खाये वो पूरा का पूरा उसके शरीर में लगे।” बोधराम सक्सेना बताया कि पशु पालन विभाग द्वारा पशुओं को कई गंभीर बीमारी से बचाने के लिए टीकाकरण अभियान शुरू किया गया है। इस अभियान में पशु चिकित्सक पशुपालकों के घर-घर जाकर पशुओं का टीकाकरण करेंगे। टीकाकरण के दौरान पशुपालकों को पशु पालन से संबंधित योजनाओं के बारे में भी जानकारी दी जाएगी

