शहर मे टेलरिंग का ब्रांड बना दुर्गा टेलर्स
यदि बात आती है फैशन की तो आजकल के लोगों की पहचान उनके कपड़ों उनके स्टाइल और उनके फैशन से होती है।फैशन के दौर मे लोग रेडीमेड कपड़े की ओर ज़्यादा जाने लगे है,लेकिन दर्जी की एहमियत जितनी पहले थी उतनी ही आज भी है।भले ही इसका एहसास हमें ना होता हो क्योंकि हम आजकल ऑनलाइन स्टोर या मॉल जाना पसंद करने लगे हैं,लेकिन जब त्यौहारों का समय होता है,या शादियों का मौसम आता है,तब कोई टेलर आपको खाली नहीं मिलता। इसलिए भी क्योंकि आज भी लोग शादियों मे पारंपरिक वस्त्र ही पहनना पसंद करते हैं।रोजाना बदलते फैशन मे कपडों के डिजाइन और सौन्दर्य को साकार करने का सबसे मशहूर प्रतिष्ठान दुर्गा टेलर्स आज अपने सिलाई कौशल से शहर मे फैशन का चलन निर्धारित कर रहा है।*
रायगढ-– 80 के दशक मे स्व.दुर्गा प्रसाद पांडेय के द्वारा शहर के लालटंकी चौक दानीपारा मे शुरु किये गये टेलरिंग का कारोबार आज उनके सुपुत्र राजेन्द्र कुमार पांडेय संभाल रहे हैं। शहर मे टेलरिंग के व्यवसाय मे एक दौर मे लिबर्टी,आइडियल, गणेश,इलियास,परमार टेलर्स जैसे कई प्रतिष्ठानों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा करते हुये 1995 मे दुर्गा टेलर्स,सिलाई के क्षेत्र मे शहर की पहचान बना और तब से लेकर आज करीब तीन दशक से शहर के नंबर 1 टेलर्स का खिताब दुर्गा टेलर्स के संचालक राजेंद्र कुमार पांडेय को ही हासिल है।टेलरिंग के क्षेत्र मे कीर्तिमान गढ़ रहे मास्टर राजेंद्र पांडेय का मानना है कि सिलाई कढ़ाई जैसे काम सिर्फ एक व्यवसाय नहीं बल्कि कला होते हैं,और इस कला में पारंगत होने के लिए आपको एक सही प्रशिक्षण और उचित शिक्षा की आवश्यकता होती है।उन्हें हैदराबाद के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेलरिंग से प्रमाण पत्र भी हासिल है। सूट स्पेशलिस्ट की पहचान से शुरु हुआ दुर्गा टेलर्स मे अब कुशल कारीगर हर तरह के फैशन वाले कपड़े सिल रहे हैं।राजेंद्र पांडेय बताते हैं कि उनका प्रयास यही रहता है कि उनके बनाये कपड़े सिर्फ उपयोगिता की दृष्टि से नहीं बल्कि दिखने मे भी अच्छे लगें।कपड़े सिलते वक्त वे इस बात का खास ख्याल रखते हैं कि इसे कौन और किस मौके पर पहनेगा।खास मौकों पर पहने जाने वाले कपडों की सिलाई के दौरान आधुनिक फैशन का विशेष ध्यान रख ग्राहक के आत्मविश्वास मे वृद्धि का प्रभाव है कि विशेष मौके खासकर शादियों के सीजन मे दुर्गा टेलर्स मे सूट सिलाई की एडवांस बुकिंग एक माह पहले बंद करनी पड़ती है। मंहगाई और कोविड महामारी के बावजूद दुर्गा टेलर्स ने ना तो सिलाई की दर बढ़ाई है और ना ही ग्राहकों की अपेक्षाओं से कोई समझौता किया है।मास्टर राजेंद्र उर्फ मानु भइया के मुताबिक रेडिमेड कपड़ों के मुकाबले कपड़ों की सिलाई आज भी सस्ती और ज्यादा आरामदायक है। विदेशों मे टेलरिंग के व्यवसाय को उम्दा माना जाता है।शहर मे लगभग साढ़े चार दशक से स्थापित टेलरिंग प्रतिष्ठान दुर्गा टेलर्स आज टेलर्स की पाठशाला बन चुका है जहां से प्रशिक्षित होकर कारीगर देश के नामी ब्राडों के लिए कपडे सिल रहे हैं। व्यवसायिक प्रतिस्पर्धा और शार्ट कट के चलन के बावजूद ईमानदारी और ग्राहकों की संतुष्टि को व्यवसाय का मूल ध्येय बनाकर दुर्गा टेलर्स शहर मे फैशन की पहचान बना हुआ है। एक छोटी सिलाई मशीन समाज मे कितना क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है और देश समाज मे आर्थिक बदलाव के साथ फैशन के आयाम गढ़ते हुए इलाके की पहचान भी बन सकता है,दुर्गा टेलर्स इसकी जीवंत मिसाल है।

