रायपुर. प्रदेश के पहले कोविड केयर इंडोर स्टेडियम समेत शहर के चार कोविड केयर सेंटरों को नगर निगम ने बंद करने का प्रस्ताव तैयार कर लिया है। स्टेडियम के अलावा इस सूची में फुंडहर और नवा रायपुर में आयुष विवि और होटल मैनेजमेंट संस्थान के सेंटर शामिल हैं। चारों सेंटर को मिलाकर 1590 बेड हैं, लेकिन अधिकांश अब खाली पड़े हैं क्योंकि ज्यादातर मरीज होम आइसोलेशन ले रहे हैं। कोविड इमरजेंसी के समय ये सारे सेंटर टेंट तथा अन्य एजेंसियों की मदद से तैयार करवाए गए थे। अब मरीज नहीं हैं लेकिन टेंट और बेड समेत बाकी सुविधाओं का किराया बहुत बढ़ गया है। इस वजह से निगम ने तय किया है कि इन्हें बंद कर दिया जाना चाहिए।
राजधानी में मई-जून में कोरोना के मामले कुछ बढ़े थे। तभी हेल्थ विभाग ने जिले में कोविड केयर सेंटर बनाने के लिए कहा था, ताकि 2 हजार और बिस्तरों का इंतजाम हो जाए। प्रशासन ने यह जिम्मा निगम को सौंपा था्। निगम ने इंडोर स्टेडियम में सबसे पहले स्मार्ट सिटी के जरिए ढ़ाई सौ बिस्तरों वाले पहले कोविड केयर सेंटर का निर्माण किया। इसके बाद शहर में 230 बिस्तर वाला फुंडहर, 150 बिस्तरों वाला आयुर्वेदिक कॉलेज, साइंस कॉलेज में 120 बिस्तरों प्रयास सड्ढ़ू में 300 और प्रयास गुढियारी में 400 बिस्तर, आयुष विवि में 700, होटल मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट में 700 और हिदायतुल्ला विवि में 500 बिस्तरों वाले केयर सेंटर बनाए गए। इसमें 3 हजार बिस्तरों की व्यवस्था की गई। मोटे तौर पर मरीज के भर्ती होने के पहले दिन के बाद अगले दिन पचास प्रतिशत और बाकी दिनों में 25 फीसदी के हिसाब से एजेंसी को चार्ज देना है। केयर सेंटर में भर्ती होने के बाद औसतन पांच से दस दिन में मरीजों की छुट्टी होती रही है। इनमें मरीजों के इलाज के लिए बिस्तर खाने जैसे बंदोबस्त करने वाली एजेंसियां प्रतिदिन के हिसाब से चार्ज कर रही हैं। हालांकि इस खर्च का हिसाब अभी तक नहीं लगाया जा सका है।
इन्हीं केयर सेंटरों में हुआ एक-तिहाई लोगों का इलाज
निगम के अनुमान के मुताबिक शहर में 18 मार्च को पहला मरीज मिलने के बाद से अब तक करीब चालीस हजार कोरोना मरीजों में से करीब 30 से 35 फीसदी यानी बारह से चौदह हजार का इलाज कोविड केयर सेंटर में हुआ है। बीते महीनों में संबंधित एजेंसियों को केयर सेंटर का चार्ज नहीं दिया गया है। हेल्थ विभाग से निगम केवल मरीजों के रुकने खाने पीने बिजली पानी और इलाज, कोविड वेस्ट का प्रबंधन वगैरह अन्य बंदोबस्त के लिए संबंधित एजेंसियों को भुगतान करेगा। केयर सेंटर बनाई गई किसी भी इमारत का किराया निगम हेल्थ विभाग से नहीं लेगा।
बंद करने का अधिकार प्रशासन का
गाइडलाइन के मुताबिक किसी भी कोविड केयर सेंटर को नगर निगम के प्रस्ताव के बाद जिला प्रशासन हेल्थ विभाग के साथ व्यापक चर्चा पत्र व्यवहार करने के बाद ही आधिकारिक रूप से बंद करेगा। नगर निगम का तर्क है कि खाली सेंटरों को इस तरह रखने से एजेंसियों को दिया जाने वाली राशि लगातार बढ़ेगी। इसलिए जहां जरूरत नहीं है वहां सेंटर बंद करना ही वित्तीय दृष्टि से भी सही रहेगा। हालांकि इन्हें बंद करने को लेकर अफसरों में अलग तरह की चिंता है। अभी शहर में लगातार कोरोना केस कम हुए हैं, लेकिन अगर किसी तरह से अचानक अधिक केस आए तब उस तरह की आपात परिस्थितियों में नए कोविड केयर सेंटर बनाने इतनी जल्दी आसानी से बंदोबस्त नहीं हो पाएंगे। लिहाजा अगर किराए के रूप में थोड़ा वित्तीय नुकसान हो भी रहा है तो इसे बर्दाश्त किया जा सकता है।
खर्च का हिसाब लगा रहे हैं
“कोविड केयर सेंटर में मरीजों पर कितना खर्च हुआ, इसका हिसाब जोड़ रहे हैं। यह पूरा खर्च स्वास्थ्य विभाग से मांगा जाएगा, ताकि संबंधित एजेंसियों को भुगतान किया जा सके।”
-बीआर अग्रवाल, नगर नियोजक

