रायपुर, 1 जनवरी 2025: छत्तीसगढ़ के सहायक शिक्षकों के लिए नए साल की शुरुआत बड़ी चिंता के साथ हुई, जब बीएड डिग्रीधारी शिक्षकों को नौकरी से निकाले जाने की खबरें सामने आईं। बीजेपी कार्यालय के बाहर नौकरी से निकाले जाने की आशंका पर बीएड डिग्रीधारी सहायक शिक्षकों ने प्रदर्शन शुरू कर दिया, जिसके बाद पुलिस ने बलपूर्वक उन्हें हटा दिया। इस प्रदर्शन में शिक्षकों ने सरकार से अपने समायोजन और अन्य संभावनाओं पर विचार करने की मांग की।
सरकार ने जारी किया अपना पक्ष:
सरकार ने इस मुद्दे पर स्पष्ट किया कि 2023 में हुई सीधी भर्ती में बीएड अर्हता वाले सहायक शिक्षकों की नियुक्ति को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने 2 अप्रैल 2024 को अमान्य कर दिया था। कोर्ट ने डीएड डिग्रीधारी अभ्यर्थियों को नियुक्त करने का आदेश दिया। इस फैसले के खिलाफ राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की थी, जिसे 28 अगस्त को खारिज कर दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट में सरकार की पुनर्विचार याचिका अब भी लंबित है।
उच्च स्तरीय समिति का गठन:
सरकार ने इस स्थिति का समाधान निकालने के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय प्रशासनिक समिति बनाने का निर्णय लिया है। इस समिति का उद्देश्य बीएड डिग्रीधारी शिक्षकों के समायोजन और अन्य संभावनाओं पर विचार करना है। सरकार ने यह भी कहा कि इस संदर्भ में विधिक मामलों और न्यायालय के आदेशों का पालन किया जाएगा।
बीएड डिग्रीधारी शिक्षकों की स्थिति:
वर्तमान में, बीएड डिग्रीधारी सहायक शिक्षकों की पदस्थापना को लेकर उच्च न्यायालय के आदेश का पालन किया जा रहा है। इन शिक्षकों की बर्खास्तगी के आदेश से पहले, उन्हें डीपीआई की ओर से सेवा समाप्ति नोटिस जारी किए जाने की संभावना थी। इन शिक्षकों ने 14 महीने पहले बस्तर और सरगुजा संभाग में पदस्थापना प्राप्त की थी, और वे NCTE के गजट और शिक्षा विभाग के दिशा-निर्देशों के तहत नियुक्त किए गए थे।
डीएलएड डिग्रीधारी अभ्यर्थियों का मुद्दा:
साथ ही, डीएलएड डिग्रीधारी अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसमें उनकी नियुक्ति को लेकर बीएड डिग्रीधारी शिक्षकों को असंगत बताया गया था। कोर्ट ने डीएलएड डिग्रीधारी अभ्यर्थियों की नियुक्ति की प्रक्रिया को मेरिट के आधार पर चलाने का निर्देश दिया। इसके परिणामस्वरूप, सरकार को बीएड डिग्रीधारी शिक्षकों की बर्खास्तगी की कार्रवाई शुरू करनी पड़ रही है।

