जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में एक अदम्य साहस की मिसाल देखने को मिली, जब हांदावाड़ा जंगल में बांस लेने गए एक पिता और पुत्र पर भालू ने हमला कर दिया। पिता को मौत के मुंह में जाता देख, पांचवीं कक्षा में पढ़ने वाले बेटे ने अपनी जान की परवाह किए बिना भालू से भिड़कर अपने पिता की जान बचाई। इस दौरान दोनों घायल हो गए, जिन्हें प्राथमिक उपचार के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया।
जंगल में हुआ हमला
सोमवार को 30 वर्षीय वंजाराम नेताम अपने 11 वर्षीय बेटे दीपेंद्र नेताम के साथ हांदावाड़ा जंगल में बांस लेने गए थे। जंगल में अचानक एक भालू ने वंजाराम पर हमला कर दिया। वंजाराम खुद को बचाने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन भालू के हमले से वह बुरी तरह घायल हो गए।
बेटे ने दिखाई अदम्य वीरता
पिता को भालू के चंगुल में फंसा देख, दीपेंद्र ने बिना अपनी जान की परवाह किए भालू से भिड़ने का फैसला किया। उसने डंडे से भालू पर हमला करना शुरू कर दिया। भालू ने दीपेंद्र पर भी हमला कर दिया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। लहूलुहान स्थिति में भी दीपेंद्र ने साहस नहीं छोड़ा और लगातार भालू पर वार करता रहा। आखिरकार, उसने भालू को भगाने में सफलता पाई।
ग्रामीणों की मदद से पहुंचाया अस्पताल
घटना के बाद दीपेंद्र ने तुरंत ग्रामीणों को सूचना दी। ग्रामीणों ने तुरंत 108 संजीवनी एंबुलेंस को बुलाया। ईएमटी और पायलट ने समय पर पहुंचकर वंजाराम और दीपेंद्र को प्राथमिक उपचार दिया और उन्हें जिला अस्पताल, दंतेवाड़ा ले गए।
दोनों की हालत स्थिर
अस्पताल सूत्रों के अनुसार, वंजाराम नेताम को भालू के हमले में गंभीर चोटें आई हैं, जबकि दीपेंद्र को भी कई घाव हुए हैं। दोनों की हालत अब स्थिर बताई जा रही है। दीपेंद्र के साहस और सूझबूझ से वंजाराम की जान बच गई, जिसके लिए स्थानीय लोग दीपेंद्र की जमकर सराहना कर रहे हैं।
एक मिसाल बनी बेटे की वीरता
इस घटना ने साबित कर दिया कि साहस उम्र का मोहताज नहीं होता। दीपेंद्र का यह साहसपूर्ण कदम न केवल अपने पिता के लिए जीवनदायिनी बना, बल्कि पूरे क्षेत्र में एक प्रेरणा का स्रोत भी बन गया। ग्रामीणों ने इस वीरता की सराहना की और कहा कि दीपेंद्र का हौसला अद्वितीय है।

