उत्तर प्रदेश के फतेहपुर में मंगलवार (4 फरवरी) को एक बड़ा रेल हादसा हो गया। कानपुर-फतेहपुर के बीच खागा में पांभीपुर के पास डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (DFC) ट्रैक पर रेड सिग्नल के कारण खड़ी कोयला लदी मालगाड़ी को पीछे से आ रही एक अन्य मालगाड़ी ने टक्कर मार दी। इस हादसे में दोनों ट्रेनों के लोको पायलट गंभीर रूप से घायल हो गए। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि आगे खड़ी मालगाड़ी का इंजन और गार्ड का डिब्बा पटरी से उतरकर नीचे गिर गया।
कैसे हुआ हादसा?
रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, पांभीपुर के पास स्थित डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर ट्रैक पर कोयला लदी एक मालगाड़ी रेड सिग्नल के कारण रुकी हुई थी। मंगलवार सुबह लगभग 8 बजे, अचानक पीछे से तेज रफ्तार में आ रही दूसरी मालगाड़ी ने इसे जोरदार टक्कर मार दी। इस टक्कर के कारण गार्ड का डिब्बा और इंजन पटरी से उतर गए, जिससे कोयला चारों तरफ बिखर गया और रेल यातायात प्रभावित हुआ। हादसे में दोनों लोको पायलट गंभीर रूप से घायल हो गए, जिन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया।
राहत और बचाव कार्य जारी
हादसे की सूचना मिलते ही रेलवे के सीनियर अधिकारी मौके पर पहुंचे और बचाव कार्य शुरू किया गया। रेलवे की टीम ने घायलों को अस्पताल भिजवाया और ट्रैक को क्लियर करने का काम शुरू किया। मालगाड़ियों के संचालन पर इस दुर्घटना का असर पड़ा है। कई मालगाड़ियों को अलग-अलग स्टेशनों पर रोका गया है और कुछ के रूट बदले गए हैं। रेलवे प्रशासन ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि यह हादसा मानवीय भूल के कारण हुआ या फिर सिग्नलिंग सिस्टम में किसी तकनीकी खामी की वजह से।
फ्रेट कॉरिडोर पर यातायात प्रभावित
इस हादसे की वजह से डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर पर रेल यातायात बाधित हो गया है। मालगाड़ियों के संचालन में देरी हो रही है, जिससे कोयला, अनाज और अन्य आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। रेलवे के इंजीनियरिंग और ऑपरेशन विभाग की टीम मौके पर मौजूद है और जल्द से जल्द ट्रैक को ठीक करने की कोशिश की जा रही है।
रेलवे प्रशासन ने दिए जांच के आदेश
रेलवे प्रशासन ने हादसे की जांच के आदेश जारी कर दिए हैं। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि क्या लोको पायलट ने रेड सिग्नल को अनदेखा किया था या फिर सिग्नल सिस्टम में कोई गड़बड़ी थी। इसके अलावा, यह भी देखा जा रहा है कि ट्रेन का ब्रेकिंग सिस्टम सही तरीके से काम कर रहा था या नहीं। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि जांच के बाद हादसे के लिए जिम्मेदार लोगों पर उचित कार्रवाई की जाएगी।
इस हादसे से एक बार फिर भारतीय रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। मालगाड़ियों की तेज रफ्तार और फ्रेट कॉरिडोर पर ट्रैफिक प्रबंधन को लेकर रेलवे को और सतर्क रहने की जरूरत है ताकि इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।

