मुंबई: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने एक बड़ा कदम उठाते हुए रेपो रेट को 0.25% घटाकर 6% कर दिया है। यह निर्णय देशभर में होम लोन, ऑटो लोन और व्यक्तिगत लोन की ब्याज दरों को कम करने का मार्ग प्रशस्त करेगा। इससे आपकी EMI में भी कमी आएगी, जिससे उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी।
रेपो रेट क्या है?
रेपो रेट वह दर है जिस पर RBI बैंकों को कर्ज मुहैया करता है। जब रेपो रेट घटती है, तो बैंकों को सस्ते कर्ज की प्राप्ति होती है, जिससे वे अपने ग्राहकों को भी कम ब्याज पर लोन प्रदान कर सकते हैं। इसका सीधा असर उपभोक्ताओं पर होता है, क्योंकि इससे वे घर खरीदने, नई कार खरीदने या व्यवसाय शुरू करने के लिए प्रेरित होते हैं।
RBI रेपो रेट क्यों घटाता या बढ़ाता है?
RBI आमतौर पर रेपो रेट को महंगाई और आर्थिक विकास को संतुलित करने के लिए संशोधित करता है। जब महंगाई में वृद्धि होती है, तो RBI रेपो रेट बढ़ाकर पैसे के प्रवाह को नियंत्रित करता है। वहीं, जब अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देना होता है, तो रेपो रेट घटाई जाती है ताकि खर्च और निवेश बढ़ सके।
RBI गवर्नर ने क्या कहा?
RBI गवर्नर ने रेपो रेट को 6% करने के पक्ष में सभी सदस्यों के वोटिंग का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि:
- मौद्रिक नीति स्टांस को न्यूट्रल से अकोमोडेटिव किया गया।
- दुनिया में ट्रेड फ्रिक्शन से भारतीय ग्रोथ प्रभावित हो सकती है।
- उच्च टैरिफ का एक्सपोर्ट पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
- कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से महंगाई में राहत मिलेगी।
- NPCI को UPI ट्रांजैक्शन लिमिट पर अधिकार मिलेगा, जिसमें वर्तमान में मर्चेंट पेमेंट की लिमिट 2 लाख रुपए है।
- गोल्ड लोन के लिए नए नियम जल्द ही लागू किए जाने की योजना है।
इस प्रकार, RBI का यह निर्णय आने वाले दिनों में लोन लेने के इच्छुक ग्राहकों के लिए सकारात्मक साबित होगा, जिससे आर्थिक गतिविधियों में भी तेज़ी आएगी।

