सूरजपुर: छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले में बाल विवाह की एक गंभीर घटना को समय रहते रोक दिया गया है। पुलिस और महिला एवं बाल विकास विभाग की संयुक्त टीम ने दो सगी बहनों का विवाह होने से बचा लिया। यह शादी 14 अप्रैल को निर्धारित थी और बहनों की उम्र 18 वर्ष से कम थी, जिसमें साढ़े तीन महीने बाकी थे।
घटना का विवरण
यह मामला प्रतापपुर थाना क्षेत्र के एक दूरस्थ गांव का है, जहां पर जुड़वाँ बहनों की शादी की तैयारी धूमधाम से चल रही थी। विवाह के कार्ड भी बाँट दिए गए थे, जिससे स्थानीय प्रशासन को इसकी जानकारी मिली। सूचना के बाद बाल संरक्षण अधिकारी एवं पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए मौके पर पहुंचकर बाल विवाह को रोक दिया।
टीम की कार्रवाई
रविवार को पुलिस, महिला एवं बाल विकास विभाग तथा बाल संरक्षण अधिकारी की संयुक्त टीम ने गांव में जाकर सभी आवश्यक कदम उठाए। टीम ने परिजनों को समझाने का प्रयास किया और बाल विवाह के खिलाफ कानून की जानकारी दी। जहां एक ओर लड़कियों के परिवारवाले विवाह की तैयारी में जुटे थे, वहीं दूसरी ओर टीम ने यह सुनिश्चित किया कि लड़कियों को कोई हानि न हो।
प्रशासन की चेतावनी
इस घटना के संदर्भ में सूरजपुर के जिला बाल संरक्षण अधिकारी ने कहा कि बाल विवाह को रोकना हमारी प्राथमिकता है। उन्होंने सभी संबंधित विभागों को अलर्ट रहने की सलाह दी है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके। उन्होंने बताया कि इस तरह की कार्रवाइयों की जरूरत है, ताकि समाज में बाल विवाह के खिलाफ जागरूकता बढ़ाई जा सके और कानूनी प्रवर्तन भी सख्त किया जा सके।
समाज में जागरूकता की आवश्यकता
बाल विवाह एक गंभीर सामाजिक समस्या है जो बच्चों के स्वास्थ्य, शिक्षा और भविष्य पर नकारात्मक प्रभाव डालती है। यह घटना एक उदाहरण है कि कैसे प्रशासनिक प्रयासों से बाल विवाह जैसे कुप्रथा को रोका जा सकता है।
सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों को भी इस दिशा में सहयोग करना आवश्यक है। सभी को मिलकर यह सुनिश्चित करना होगा कि कोई भी बच्चा इस तरह की स्थिति का शिकार न हो और उन्हें सुरक्षित और शिक्षित जीवन जीने का अधिकार प्राप्त हो। बाल संरक्षण और जागरूकता अभियान से ऐसी घटनाओं को समाप्त करने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है।

