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कोतमा: छत्तीसगढ़ में कोतमा पुलिस ने पशु तस्करी के खिलाफ एक महत्वपूर्ण कार्यवाही करते हुए 22 नग मवेशियों को जप्त किया है। यह जानकारी प्राप्त हुई थी कि कुछ व्यक्तियों द्वारा मवेशियों को पशु परिवहन के लिए एक जंगल में बांधकर रखा गया है। पुलिस ने मुखबिर की सूचना पर तुरंत कार्रवाई की।
मुखबिर की सूचना पर कार्रवाई
थाना कोतमा को मिली मुखबिर की जानकारी के अनुसार, ग्राम कैसोरी के जंगल में कुछ मवेशियों को बांधकर रखा गया था। सूचना की तस्दीक के लिए एक पुलिस टीम ने मौके पर घेराबंदी कर रेड कार्यवाही की। रात्रि का समय होने के कारण अंधेरे का लाभ उठाते हुए वहां मौजूद व्यक्ति फरार हो गए। पुलिस ने 20 नग पड़वा (भैसा) और 2 नग भैस को बिना पानी और चारे के अत्यंत क्रूरता से बंधा हुआ पाया।
मवेशियों की जप्ति और आर्थिक मूल्य
जप्त किए गए मवेशियों में 20 नग पड़वा और 2 नग भैंस शामिल हैं। इनकी अनुमानित कीमत लगभग 50 हजार रुपये प्रति मवेशी है, जिसके अनुसार कुल मिलाकर इनकी कीमत लगभग 11 लाख रुपये है। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ जानकारी इकट्ठा करने के लिए आस-पास के लोगों से पूछताछ की, जिसमें पता चला कि सिलपुर निवासी मुन्ना लोनी अपने साथियों के साथ मवेशियों की तस्करी कर रहा था।
कानूनी कार्रवाई
जिन मवेशियों को जप्त किया गया, उनमें से कई को पहले से ही बिना चारा-पानी के बंधे पाया गया था। आरोपियों के खिलाफ थाना कोतमा में पशु क्रूरता अधिनियम के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया है, जिसमें धारा 11 (घ), 6, 6(क), 6(ख)(1), 9, 10 के तहत कार्रवाई की गई।
पुलिस की सराहनीय भूमिका
इस कार्यवाही में सशस्त्र उप निरीक्षक सुरेश अहिरवार, चालक आर. अनिल सिंह मरावी और आर. अभय त्रिपाठी की भूमिका सराहनीय रही। इनकी तत्परता और प्रभावी पुलिसिंग ने इस गंभीर मामले पर तुरंत कार्रवाई को संभव बनाया।
पशु तस्करी की घटनाओं को रोकने के लिए पुलिस की इस तरह की सक्रियता न केवल मवेशियों की सुरक्षा सुनिश्चित करती है, बल्कि समाज में एक सकारात्मक संदेश भी भेजती है कि ऐसे कृत्यों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस प्रकार की कार्यवाही से यह स्पष्ट है कि पुलिस प्रशासन मवेशियों के प्रति क्रूरता को रोकने के लिए तत्पर है।

