सक्ती। छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले में सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर एक बड़ी लापरवाही उजागर हुई है। ग्राम पंचायत रेड़ा में स्थित शासकीय प्राथमिक शाला खैरा के प्रधानाध्यापक भानु प्रताप उइके को शराब के नशे में स्कूल पहुंचने के कारण निलंबित कर दिया गया। यह कार्रवाई जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) नरेंद्र चंद्रा ने ग्रामीणों की शिकायत के आधार पर की।
डीईओ ने जब ग्राम पंचायत रेड़ा का आकस्मिक निरीक्षण किया, तब ग्रामीणों ने खुलकर प्रिंसिपल की शिकायत की। ग्रामीणों का आरोप था कि भानु प्रताप उइके अक्सर शराब के नशे में स्कूल आते हैं और उनकी पढ़ाई में कोई रुचि नहीं होती। इसके साथ ही, उन्होंने यह भी बताया कि प्रधानाध्यापक बिना सूचना के कई दिनों तक अनुपस्थित रहते हैं, जिससे बच्चों की शिक्षा प्रभावित हो रही है।
निरीक्षण के दौरान, डीईओ ने पाया कि प्रधान पाठक पिछले तीन दिनों से बिना किसी सूचना के अनुपस्थित थे। स्थानीय शिक्षकों और ग्रामीणों की शिकायतों और बयानों के आधार पर उन्होंने बिना देर किए निलंबन का आदेश जारी कर दिया। इसके साथ ही, डीईओ ने अन्य स्कूलों में शिक्षकों की उपस्थिति और कार्यप्रणाली की भी जांच करने का निर्णय लिया, ताकि इस प्रकार की लापरवाही की पुनरावृत्ति न हो।
डीईओ की इस त्वरित कार्रवाई से ग्रामीणों में प्रशासन के प्रति विश्वास बढ़ा है। ग्रामीणों ने जिला शिक्षा अधिकारी नरेंद्र चंद्रा का आभार व्यक्त किया और कहा कि इस प्रकार की कार्रवाई से स्कूलों में व्यवस्था में सुधार होगा, जिससे बच्चों की पढ़ाई और भविष्य पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
डीईओ ने कहा, “ग्रामीणों की शिकायत पूरी तरह से सही पाई गई। ऐसे शिक्षक जो बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं, उनके खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे।” इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि शिक्षा व्यवस्था में किसी भी प्रकार की लापरवाही को सहन नहीं किया जाएगा और सरकारी अधिकारियों की जिम्मेदारी है कि वे छात्रों के हितों की रक्षा करें।

