धमतरी जिले के वन विभाग का एक चिंताजनक मामला सामने आया है, जिसमें टाइगर रिजर्व जैसे संवेदनशील क्षेत्र में गजराज वाहन का उपयोग पुराने ईंटों और कवेलू के अवैध परिवहन में किया जा रहा है। यह वाहन, जो आमतौर पर वन्य प्राणियों की सुरक्षा और आपात स्थितियों के लिए तैनात होता है, वर्तमान में अनधिकृत निर्माण सामग्री ढोने के लिए प्रयुक्त हो रहा है।
यह घटना उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के अरसीकन्हार वन परिक्षेत्र की है। 2018-19 में राज्य कैम्पा मद से वनपाल और वनरक्षकों के लिए आवास, सीसी रोड, बाउंड्री वॉल और वाहन शेड बनाने के लिए 1.15 करोड़ रुपये की लागत से कार्य स्वीकृत किए गए थे। हालाँकि, यह निर्माण पिछले 4-5 वर्षों से अधूरा पड़ा है, और इसकी गुणवत्ता को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
स्थल निरीक्षण के दौरान यह पाया गया कि फरसगांव में डिस्मेंटल किए गए पुराने भवनों से ईंटें लाकर नए आवासों के शौचालय टैंक और सीढ़ियों में उपयोग की जा रही हैं। इन पुरानी ईंटों को गजराज वाहन से ढोया जा रहा है। इससे यह वाहन खुद बुरी तरह जर्जर हो चुका है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि क्या वन विभाग के पास इतना भी बजट नहीं है कि नए निर्माण में नई ईंटें इस्तेमाल की जा सकें। निर्माण कार्य की धीमी गति और घटिया गुणवत्ता से ग्रामीणों में भारी नाराजगी उत्पन्न हो रही है। अधूरे आवासों में अब आवारा मवेशियों ने डेरा डाल लिया है और दीवारों में दरारें पड़ चुकी हैं।
इस मामले पर जब विभागीय पक्ष से जानकारी प्राप्त करने के लिए वन विभाग कार्यालय का दौरा किया गया, तो पता चला कि क्षेत्रीय अधिकारी किसी अन्य कार्य से गरियाबंद गए हैं। उनसे फोन पर संपर्क करने का प्रयास भी सफल नहीं हो सका। यह घटनाक्रम वन विभाग की कार्यशैली और पारदर्शिता पर सवाल उठाता है और यह चिंता का विषय बन गया है कि संवेदनशील क्षेत्रों में इस प्रकार की लापरवाही कितनी गंभीर हो सकती है।
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए, स्थानीय अधिकारियों को जल्द से जल्द कार्रवाई करने की जरूरत है, ताकि भविष्य में ऐसी समस्याओं से निपटा जा सके और वन्य प्राणियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

