बिलासपुर. पूर्व विधानसभा अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद शुक्ल की मौत के मामले में एक नई मोड़ आया है। अपोलो अस्पताल के एक फर्जी डॉक्टर और अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज की गई है। इस मामले में आरोपी डॉक्टर नरेंद्र विक्रमादित्य यादव ने राजेंद्र प्रसाद शुक्ल का ऑपरेशन किया था, जिसके 20 दिन बाद उनकी मृत्यु हो गई।
सरकंडा थाना में शिकायत दर्ज करते हुए, स्व. राजेंद्र प्रसाद शुक्ल के बेटे प्रदीप शुक्ल ने आरोप लगाया है कि यह फर्जी डॉक्टर एक कार्डियोलॉजिस्ट होने का दावा करते हुए बिना उचित शैक्षिक योग्यता के इलाज करने में लापरवाही बरत रहा था। उनके अनुसार, इस लापरवाही के कारण ही उनके पिता की मौत हुई।
प्रारंभिक जांच में, आरोपी डॉक्टर की पहचान से जुड़ी कई विसंगतियाँ पाई गईं। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि आरोपी के नाम, जन्मतिथि और पिता के नाम में भिन्नता पाई गई है, जो उसकी पहचान को संदिग्ध बनाती है। इसे देखते हुए, पुलिस ने पहले ही आरोपी डॉक्टर की गिरफ्तारी मध्यप्रदेश के दमोह से कर ली है।
आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन ने बिना कोई दस्तावेज सत्यापित किए, फर्जी डॉक्टर को भर्ती किया, जिससे मरीज को इलाज का मौका मिला। इस गंभीर लापरवाही के चलते ना केवल स्वतंत्रता से स्वास्थ्य सेवाओं के प्रदायक के तौर पर उनकी भूमिका को सवाल किया गया है, बल्कि अस्पताल प्रबंधन की जिम्मेदारी भी उजागर हुई है।
पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू कर दी है। अस्पताल प्रबंधन की Rolle की गहन जांच की जा रही है, जिसमें यह पता चलाने की कोशिश की जा रही है कि क्या अस्पताल के अधिकारियों ने फर्जी डॉक्टर के डॉक्यूमेंट की उपयुक्तता की जाँच की थी या नहीं।
इस घटना ने न केवल स्व. राजेंद्र प्रसाद शुक्ल के परिवार को परेशान किया है बल्कि अस्पताल में इलाज कर रहे अन्य मरीजों के लिए भी सवाल खड़ा किया है। प्रबंधन की लापरवाही के चलते मरीजों की जान को खतरा हो सकता है, जिसने स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में विश्वसनीयता पर सवाल उठाया है।
फिलहाल, इस मामले में जांच जारी है, और पुलिस ने उजागर होने वाले तथ्यों के आधार पर कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है। यह घटना इस बात का उदाहरण है कि स्वास्थ्य सेवाओं में कानूनी और नैतिक जिम्मेदारियों का पालन करना कितना महत्वपूर्ण है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचा जा सके। स्व. राजेंद्र प्रसाद शुक्ल की अंतिम यात्रा के बाद उनकी याद में यह चर्चा जारी रहेगी कि किस तरह एक फर्जी डॉक्टर ने एक सम्मानित नेता की जान ले ली।

