जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हाल ही में हुए आतंकी हमले के बाद, जिसमें 26 लोगों की मौत हुई थी, भारत सरकार ने पाकिस्तान के खिलाफ कठोर कदम उठाने का निर्णय लिया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों से संपर्क किया है और उन्हें निर्देश दिए हैं कि वे अपने क्षेत्रों में पाकिस्तानी नागरिकों की पहचान करें और उनकी शीघ्र वापसी सुनिश्चित करें।
सूत्रों के अनुसार, अमित शाह ने शुक्रवार को मुख्यमंत्रियों से कहा कि किसी भी पाकिस्तानी नागरिक को भारत में निर्धारित समय सीमा से अधिक नहीं रहने दिया जाना चाहिए। इस संदर्भ में, सरकार ने 27 अप्रैल से प्रभावी रूप से पाकिस्तान के नागरिकों को जारी सभी वीजा रद्द करने की घोषणा की है। पाकिस्तानी नागरिकों को कहा गया है कि वे 1 मई तक भारत छोड़ दें, जिसमें उन लोगों का भी समावेश है जिन्होंने पहले से वीजा लिया हुआ है।
आतंकी हमले की पृष्ठभूमि
यह सब तब शुरू हुआ जब जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में एक भीषण आतंकी हमला हुआ, जिसमें आतंकवादी बैसरन घाटी में पर्यटकों पर गोलीबारी करते हुए 26 लोगों की जान ले ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हमले के तुरंत बाद गृह मंत्री अमित शाह से आपात फोन पर बातचीत की और उचित कदम उठाने को कहा। इसके बाद अमित शाह ने उच्च स्तरीय बैठक भी बुलाई, जिसमें सुरक्षा एजेंसियों को निर्देश दिए गए।
सरकार द्वारा उठाए गए कदम
इस हमले के परिणामस्वरूप, भारत ने पाकिस्तान को कई गंभीर झटके दिए हैं। इनमें सबसे पहला कदम 1960 की सिंधु जल संधि को तत्काल प्रभाव से निलंबित करना है। सरकार ने यह कहते हुए कहा कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद का समर्थन देना बंद नहीं करता, तब तक यह संधि निलंबित रहेगी।
इसके अलावा, अटारी एकीकृत चेक पोस्ट को बंद कर दिया गया है और जिन लोगों ने पार करने की अनुमति ली है, उन्हें 1 मई से पहले लौटने की अनुमति दी गई है। पाकिस्तानी नागरिकों को एसवीईएस वीजा के तहत भारत आने की अनुमति नहीं दी गई है और पहले से जारी सभी एसवीईएस वीजा रद्द कर दिए गए हैं।
नए निर्देशों का प्रभाव
राज्य मुख्यमंत्रियों को दिए गए निर्देश में यह भी कहा गया है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में रह रहे पाकिस्तानी नागरिकों की पहचान करें और उनका निर्वासन सुनिश्चित करें। इससे यह साफ होता है कि सरकार इस मुद्दे को लेकर कितनी गंभीर है और यह स्पष्ट रूप से आतंकवाद के खिलाफ उठाए गए कदमों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
कूटनीतिक कदम
भारत ने यह भी घोषणा की है कि वो अपने रक्षा कर्मचारियों को इस्लामाबाद स्थित भारतीय उच्चायोग से वापस बुलाएगा और पाकिस्तानी उच्चायोग के अधिकारियों को अवांछित घोषित किया गया है। उन्हें एक सप्ताह का समय दिया गया है कि वे भारत छोड़ दें। इसके साथ ही, भारत ने उच्चायोग में मौजूद स्टाफ की संख्या को घटाने का निर्णय लिया है।
बीएसएफ के कदम
सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) ने भी पंजाब के अटारी, हुसैनीवाला और सादकी में रिट्रीट समारोह के दौरान औपचारिक प्रदर्शन को कम करने का निर्णय लिया है, जिसमें भारतीय और पाकिस्तानी गार्ड कमांडरों के बीच प्रतीकात्मक हाथ मिलाने की प्रक्रिया को निलंबित किया गया है। यह कदम भारत की गंभीर चिंता को दर्शाता है कि शांति और उकसावे एकसाथ नहीं रह सकते।
इस प्रकार, यह सभी जिम्मेदारी के साथ उठाए गए कदम भारत के सुरक्षा और संप्रभुता की रक्षा के लिए हैं और यह दर्शाता है कि सरकार किसी भी प्रकार की गतिविधियों के प्रति कितनी सतर्क है।

