छत्तीसगढ़ में हाल ही में सरकारी अस्पतालों में मीडिया कवरेज पर लगाई गई पाबंदी का आदेश अब निरस्त कर दिया गया है। पत्रकारों के व्यापक विरोध, जनप्रतिनिधियों की आलोचना और स्वयं मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की तीखी नाराजगी के बाद चिकित्सा शिक्षा विभाग ने इस विवादित आदेश को वापस ले लिया है। यह फैसला राज्य में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, जनहित और लोकतांत्रिक मूल्यों की जीत के रूप में देखा जा रहा है।
विवाद का आरंभ
चिकित्सा शिक्षा विभाग की ओर से कुछ दिन पहले जारी आदेश में प्रदेश के सभी सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में मीडिया कवरेज को लेकर कठोर दिशा-निर्देश जारी किए गए थे। आदेश में स्पष्ट रूप से कहा गया था कि अस्पताल परिसर में बिना अनुमति किसी भी प्रकार की फोटो या वीडियो रिकॉर्डिंग प्रतिबंधित रहेगी। यह भी निर्देश दिया गया था कि मीडिया को मरीजों या डॉक्टरों से बात करने से पहले प्रशासन की इजाजत लेनी होगी।
इस आदेश ने राज्यभर के पत्रकारों में आक्रोश पैदा कर दिया। इसे अभिव्यक्ति की आज़ादी पर सीधा हमला और सूचना के अधिकार का हनन माना गया। पत्रकारों ने इसे “तुगलकी फरमान” करार देते हुए राजधानी रायपुर समेत कई जिलों में सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया। जगह-जगह आदेश की प्रतियां जलाकर विरोध दर्ज कराया गया।
मुख्यमंत्री ने जताई कड़ी नाराजगी
इस मसले पर तब नया मोड़ आया, जब मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस आदेश पर सार्वजनिक रूप से नाराजगी जाहिर की। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार मीडिया की स्वतंत्रता का सम्मान करती है और जनहित में सूचना का प्रसार आवश्यक है। मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से स्वास्थ्य विभाग को तत्काल निर्देश दिया गया कि ऐसे किसी भी आदेश को तुरंत वापस लिया जाए, जो पत्रकारों के काम में बाधा डाले।
मुख्यमंत्री की इस तीव्र प्रतिक्रिया के बाद चिकित्सा शिक्षा विभाग ने आदेश को “स्थगित” करने की घोषणा की और स्पष्ट किया कि भविष्य में कोई भी निर्देश जारी करने से पहले सभी हितधारकों से विचार-विमर्श किया जाएगा।

