डौंडी थाना क्षेत्र के सनसनीखेज दुष्कर्म और आर्थिक शोषण मामले में आरोपी बीजापुर के डिप्टी कलेक्टर दिलीप उइके को जिला अदालत से बड़ी राहत नहीं मिल सकी। अदालत ने सोमवार को उनकी जमानत अर्जी को खारिज कर दिया। न्यायालय ने पीड़िता की गवाही और दस्तावेजी साक्ष्यों को गंभीर मानते हुए यह फैसला सुनाया।
पीड़िता की दलील
पीड़िता, जो कि सीएएफ (छत्तीसगढ़ आर्म्ड फोर्स) की महिला आरक्षक है, ने अदालत में खड़े होकर अपनी पीड़ा बयां की। उसने बताया कि दिलीप उइके ने शादी का झांसा देकर वर्षों तक उसका यौन शोषण किया। इस दौरान तीन बार जबरन गर्भपात भी कराया गया। महिला ने यह भी आरोप लगाया कि आरोपी ने लगातार आर्थिक शोषण किया और उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित किया।
सबूतों पर अदालत का भरोसा
पीड़िता ने अपने आरोपों को साबित करने के लिए बैंक स्टेटमेंट समेत कई दस्तावेज अदालत के सामने पेश किए। अदालत ने इन साक्ष्यों को महत्वपूर्ण मानते हुए कहा कि आरोप prima facie (प्रथम दृष्टया) गंभीर हैं और इन्हें नकारा नहीं जा सकता। इस वजह से अदालत ने आरोपी की जमानत याचिका खारिज कर दी।
आरोपी पक्ष की दलील नकार दी गई
दिलीप उइके के वकील ने अदालत में तर्क दिया कि महिला झूठे आरोप लगाकर ब्लैकमेल करने की कोशिश कर रही है। लेकिन न्यायाधीश ने इस दलील को खारिज करते हुए कहा कि प्रस्तुत गवाही और दस्तावेज इस मामले की गंभीरता को स्पष्ट करते हैं। अदालत ने माना कि फिलहाल आरोपी को जमानत देना न्याय के हित में नहीं होगा।
पुलिस की कार्रवाई
थाना प्रभारी उमा ठाकुर ने बताया कि इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 69 के तहत अपराध दर्ज किया गया है। दिलीप उइके वर्तमान में फरार है। उसकी तलाश में पुलिस ने विशेष टीम गठित की है और लगातार दबिश दी जा रही है। पुलिस का दावा है कि आरोपी बहुत जल्द कानून की गिरफ्त में होगा।
सामाजिक और प्रशासनिक हलचल
एक उच्च प्रशासनिक पद पर बैठे अधिकारी पर गंभीर आरोप लगने से न केवल जिले में बल्कि पूरे प्रदेश में चर्चा का माहौल है। इस मामले ने सरकारी तंत्र की छवि पर सवाल खड़े कर दिए हैं। वहीं पीड़िता का कहना है कि उसे न्याय मिलने तक वह संघर्ष जारी रखेगी।
अदालत के इस आदेश के बाद साफ है कि आरोपी डिप्टी कलेक्टर के लिए कानूनी मुश्किलें और बढ़ गई हैं, जबकि पुलिस पर अब जल्द गिरफ्तारी का दबाव है।


