रायगढ़. एसईसीएल की कोयला खदानों की सुरक्षा अब त्रिपुरा स्टेट राइफल्स के एक हजार सशस्त्र जवान करेंगे। यहां डीजल, कबाड़ और कोयला चोर गिरोह को रोकने के लिए एसईसीएल अब खदानों के भीतर भी सुरक्षा के सशस्त्र जवानों की तैनाती करेगी। इसके लिए एसईसीएल और त्रिपुरा सरकार के बीच एमओयू होने वाला है। कोल इंडिया की सात कंपनियों में से एक एसईसीएल की जिले के कोयला खदानों में भी यह व्यवस्था लागू की जाएगी। यहां पहले से केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल सीआइएसएफ के जवान खदान के बाहरी क्षेत्र की सुरक्षा में तैनात हैं। उन्हें बैरियर सुरक्षा की जिम्मेदारी एसईसीएल ने दे रखी है। 200 विभागीय सुरक्षा कर्मी खदान के अंदर की सुरक्षा करते हैं। खदान में औसतन आठ से दस सुरक्षा कर्मी ही रात को गश्त करते हैं। इसका फायदा डीजल, कबाड़ और कोयला चोर गिरोह उठा रहे हैं। हथियारबंद अपराधी सुरक्षाकर्मियों के सामने ही खदान में घुसकर कीमती कलपुर्जे व भारी वाहनों से डीजल निकालकर ले जाते हैं। रोकने की कोशिश करने पर सुरक्षाकर्मियों पर जानलेवा हमला कर देते हैं। लगातार हो रहे नुकसान को देखते हुए प्रबंधन ने खदान के अंदर सुरक्षा को पुख्ता करने का निर्णय लिया है। एसईसीएल खदानों की सुरक्षा पर पहले ही सालाना 300 करोड़ से अधिक खर्च कर रही है।
दिसंबर से होगी जवानों की तैनाती
एसईसीएल के जनसंपर्क अधिकारी मिलिंद चहांदे का कहना है कि दिसंबर में त्रिपुरा राज्य राइफल्स के जवान खदानों में उतार दिए जाएंगे। इसके लिए एसईसीएल के अफसर त्रिपुरा में है, और राज्य सरकार के साथ एमओयू की प्रक्रिया चल रही है। इसके बाद खदानों के बाहर और भीतर दोनों तरफ त्रिपुरा राइफल के सशस्त्र जवान तैनात किए जाएंगे। साभार: दैनिक भास्कर

