रायगढ़. छठ पूजा के लिए सोमवार को जिला प्रशासन ने गाइडलाइन जारी कर दी है। छठ पूजा पर प्रतिबंध नहीं लगाया गया है लेकिन दुर्गा पूजा और नवरात्र की तरह नियम सख्त किए गए हैं ताकि घाटों पर भीड़ को रोका जा सके। बंदिशों के साथ पारंपरिक और सामूहिक रूप से छठ पूजा करना मुश्किल होगा लेकिन सुरक्षा उपाय अपना कर अपने घर में ही व्रती परंपरा के अनुरूप छठ पूजा कर सकते हैं। बड़े शहर जहां घाट और तालाब कम हैं या घर से दूर हैं वहां ऐसे उपायों के साथ ही छठ पूजा की जाती है। जिले में छठ की तैयारी हो चुकी है। इस बार यातायात के साधन कम होने के कारण बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश के प्रवासियों को अपने गांव जाना मुश्किल होगा। ये लोग इस बार यहीं छठ व्रत और पूजा करेंगे। वहीं बड़ी संख्या में जिले में रहने वाले पूर्वांचल के लोग यहां छठ पूजा करते हैं। भीड़ इस बार ज्यादा होगी। छठ की शुरुआत 18 नवंबर से होगी। घाटों पर लोगों ने तैयारी शुरू कर दी है वहीं बूढ़ी माई मंदिर करबला तालाब की सफाई नगर निगम ने कुछ दिनों पहले ही करा दी है। अब प्रशासन ने छठ घाट पर सामूहिक पूजा करने की अनुमति नहीं दी है। पूर्वांचल के हजारों लोग शहर और जिलेभर में निवास करते हैं। लगभग 500 परिवार छठ पूजा करते हैं जबकि हजारों लोग अर्घ्य देने और प्रसाद लेने घाटों पर जाते हैं।
ये इंतजाम हों तो घर में सुरक्षित ढंग से कर सकते हैं छठ पूजा
बाजार में 1 हजार से 3 हजार रुपए में अलग-अलग साइज के हवा वाले टब और बच्चों के खेलने वाले स्विमिंग पूल मिलते हैं। इसे घर की छत या आंगन या घर के नजदीक खुली जगह पर रख सकते हैं।
ईंट रख, उसमें प्लास्टिक शीट बिछाकर अस्थायी कुंड बनाया जा सकता है। इसमें दो लोग अर्घ्य दे सकते हैं और डुबकी भी लगा सकते हैं। देश के बड़े शहरों में कोरोना-काल से पहले भी लोग घरों में ऐसे इंताजम के साथ पूजा करते रहे हैं। व्रतियों के अलावा अर्घ्य देने वाले श्रद्धालुओं को दिक्कत नहीं होगी।
जिला प्रशासन की गाइडलाइन में यह निर्देश
छठ घाट पर आयोजन समितियां फिजिकल डिस्टेंसिंग के लिए बेरिकेडिंग करेगी।
छठ घाट जाने वाले हर व्यक्ति के लिए मास्क अनिवार्य
सैनिटाइजर, थर्मल स्क्रीनिंग, ऑक्सीमीटर, हैंडवॉश और लोगों को कतार में लगाने की जिम्मेदारी आयोजन समिति की।
एक परिवार के 2 व्यक्ति से ज्यादा छठ घाट पर इकट्ठा नहीं होंगे।
कमर से नीचे तक पानी में खड़े हो सकते हैं, डुबकी नहीं लगा सकते।
60 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्ग और 10 साल से कम उम्र के बच्चों या किसी बीमार व्यक्ति के छठ घाट आने पर प्रतिबंध होगा।
छठ घाट पर बैठने की कोई व्यवस्था नहीं होगी और ना ही कोई साउंड सिस्टम होगा।
छठ महापर्व के कार्यक्रम
नहाय-खाय – 18 नवंबर
खरना – 19 नवंबर
सूर्यास्त अर्घ्य – 20 नवंबर
सूर्योदय अर्घ्य – 21 नवंबर
साभार: दैनिक भास्कर


