पेंड्रा. छत्तीसगढ़ के मरवाही वन परिक्षेत्र में दुर्लभ प्रजाति के सफेद भालू की कुएं में गिरने से मौत हो गई। वह एक साल का था।
मरवाही वन परिक्षेत्र के ग्राम अंडी की घटना, किसान की बाड़ी में बने कुएं में गिरा भालू का बच्चा
कुंए में पड़े मां के पंजों के निशान, ग्रामीणों की सहायता से वन विभाग ने शव बाहर निकलवाया
छत्तीसगढ़ के गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (GPM) जिले में सोमवार तड़के कुएं में गिरने से दुर्लभ प्रजाति के सफेद भालू की मौत हो गई। बच्चे को बचाने के लिए मां आधे घंटे तक कोशिश करती रही, लेकिन कामयाब नहीं हो सकी। ग्रामीणों की सूचना पर वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और शव को बाहर निकलवाया। पोस्टमार्टम के बाद उसका अंतिम संस्कार किया जाएगा। घटना मरवाही वन परिक्षेत्र की है।
जानकारी के मुताबिक, ग्राम अंडी में किसान सुंदर सिंह की बाड़ी में कुंआ बना हुआ है। इसी कुएं में रविवार देर रात करीब 3.30 बजे एक भालू का बच्चा गिर गया। बच्चे के कुएं में गिरने के बाद उसकी मां जोर-जोर से चीखने लगी। उसने कुएं की दीवार के पत्थरों को अपने पंजों से निकाल दिया। उसकी आवाज सुनकर ग्रामीण भी बाहर निकल आए, लेकिन कोई पास जाने की हिम्मत नहीं जुटा सका।
सुबह वन विभाग की टीम पहुंची, पर तब तक मौत हो चुकी थी
काफी कोशिश के बाद भी जब बच्चे को नहीं निकाल सकी तो मादा भालू डोंगरी की ओर चली गई। इसके बाद ग्रामीण कुएं के पास पहुंचे और अंदर भालू का सफेद बच्चा पड़ा दिखाई दिया। इसके बाद उन्होंने वन विभाग को सूचना दी। सुबह करीब 6.30 बजे डिप्टी रेंजर मानसिंह श्याम अन्य कर्मियों के साथ घटनास्थल पर पहुंचे और ग्रामीणों की सहायता से कुएं में गिरे हुए शव को बाहर निकलवाया।
DFO सहित अन्य वनाधिकारी भी मौके पर पहुंचे
हालांकि तब तक भालू के बच्चे की डूबने से मौत हो चुकी थी। डिप्टी रेंजर मानसिंह श्याम ने बताया कि कुएं में करीब 12 फीट पानी भरा हुआ है। घटना की जानकारी उच्चाधिकारियों को दे दी गई थी। जिसके बाद DFO राकेश मिश्रा और SDO व वन परिक्षेत्र अधिकारी भी मौके पर पहुंच गए थे। बच्चे की उम्र करीब एक साल बताई जा रही है।
पहली बार 1995 में मिला था मरवाही में सफेद भालू
मरवाही के जंगलों में सफेद भालू पहली बार छत्तीसगढ़ बनने से पहले साल 1995 में मिला था। उसे इंदिरा उद्यान पेंड्रा के रेस्क्यू सेंटर में रखा गया था, लेकिन दुर्लभ प्रजाति का होने के कारण इसे तब मध्यप्रदेश शासन ने भोपाल के चिड़ियाघर भिजवा दिया। जहां वह कई वर्षों तक रहा।
साभार: दैनिक भास्कर

