किसान हर महीने बेच रहे हैं 30 से 40 हजार रुपए का गोबर, लैलूंगा, पुसौर, खरसिया में हुई सबसे ज्यादा खरीदी
रायगढ़. जिले में गोबर खरीदी तेजी से हो रही है लेकिन कंपोस्ट (खाद) बनाने में जिले के गौठान पीछे हैं। जिले के 221 गौठानों में 100 गौठानों में ही कंपोस्ट तैयार हो रहा है। पुसौर, लैलूंगा, खरसिया ब्लॉक में गोबर खरीदी खूब हुई है लेकिन कम्पोस्ट बनाने के मामले में ये ब्लाक पिछड़े हुए हैं।
लैलूंगा के राजपुर और कोड़ासिया गांव में, पुसौर के छिछोर उमरिया, कोतासुरा और खरसिया के जोबी, लोड़ाझर जैसे गौठानों में काफी ज्यादा गोबर खरीदी हो रही है। कलेक्टर की पहल पर स्वीकृत मिल गई है लेकिन टांका नहीं बन पाया है। गौठान समिति के सदस्यों का कहना है कि टांका बनाने के बाद कम्पोस्ट तैयार करेंगे।
लैलूंगा का राजपुर गौठान- यहां पर 1 लाख 57 हजार क्विंटल गोबर की खरीदी हुई है लेकिन वर्मी कम्पोस्ट से सिर्फ 30 क्विंटल बन पाया है। गौठान से जुड़े मनोज पैकरा बताते हैं कि 30 वर्मी टांके बनने हैं जिसमें अभी सिर्फ 20 टांके पूरे हुए हैं। धीरे-धीरे खाद बनाया जा रहा है। हालांकि इतनी बड़ी मात्रा में गोबर रखना भी गौठान प्रबंधन के लिए मुसीबत भरा काम बना गया है। सलखिया के गुरुकुल के जोगी भोई ही 10-15 क्विंटल गोबर बेचते हैं।
फैक्ट फाइल
जिले में गौठान- 221, 9 गौठान शहरी इलाकों में 212 ग्रामीण इलाकों में
गौठानों में वर्मी कंपोस्ट बनाने 100 टांके तैयार
वर्मी कम्पोस्ट बनाने के लिए जिले में में 8450 स्वीकृत हुए हैं, 6300 बन चुके हैं
कृषि विभाग के 212 गौठानों में 10-10 वर्मी बेड दिया गया है, जिसमें खाद बनाया जा सके।
चार महीने में ही 96 हजार रुपए कमाए तरूराम ने
पुसौर के छिछोरउमरिया में सबसे ज्यादा गोबर खरीदी हो रही है। यहां 5 लाख 19 हजार क्विंटल गोबर खरीदी हुई है। लेकिन खाद सिर्फ 42 क्विंटल बनाया जा सका है। गौठान में तरूराम यादव 11 क्विंटल गोबर हर रोज बेचते हैं। तरू 154 घरों से गोबर इकट्ठा करते हैं, 4 माह के भीतर में 96 हजार रुपए कमा लिए हैं। गौठान प्रभारी प्रसन्नजीत भोई बताते हैं कि यहां 60 वर्मी कंपोस्ट टांका बनाने की स्वीकृति मिली लेकिन सिर्फ 30 टांके ही बन सके हैं। कंपोस्ट बनाने का काम धीमा है।
5 करोड़ 25 लाख रुपए का गोबर खरीद चुके हैं
“जिले में किसानों में 5 करोड 25 लाख रुपए का गोबर खरीद चुके हैं। गोबर काफी ज्यादा खरीदा जा चुका है। गोबर अधिक है इसे देखते हुए डिकंपोजर टांका लगाया है, जिसमें वहां गोबर डाला जा सके। टांका बनने के बाद केंचुए की उपलब्धता नहीं थी। अब सरकार ने बीज निगम के अलावा दूसरी जगहों से केचुआ लेने के लिए कहा है।”
-ललित मोहन भगत, उपसंचालक कृषि विभाग
साभार: दैनिक भास्कर

