गार्डन की हरियाली हो रही गायब, लोगों के बैठने के लिए बेंच भी नहीं लगे, बदहाली के लिए अफसर बना रहे फंड का बहाना
जशपुर. शहर के हृदय स्थल में स्थित सती उद्यान की रौनक अब तक नहीं लौट सकी है। जबकि उसे जीर्णोद्धार पर नगर पालिका करीब 23 लाख 84 हजार रुपए भी खर्च कर चुकी है। पर अब तक न तो इस पार्क में फूल-पौधों की हरियाली है और ना ही लोगों के बैठने के लिए बेंच। कभी शाम को गुलजार रहने वाले इस पार्क में अब कोई आता-जाता भी नहीं। पार्क लंबे समय से बेनूर पड़ा हुआ है। रानी सती उद्यान शहर के लोगों के मनोरंजन का मुख्य केंद्र है। पहले इस पार्क में लोगों की खासी चहल-पहल रहती थी। उद्यान के प्रांगण में ही वशिष्ठ कम्युनिटी हाल भी स्थित है। जहां शहर के अधिकांश वैवाहिक व सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ सरकारी आयोजन होता है। यह पार्क तालाब के बीच स्थित है। जिससे इसकी खूबसूरती और बढ़ जाती है। नगर पालिका ने 2015 में इसके जीर्णोद्धार का फैसला लिया था। जिसके बाद नगर पालिका के प्रस्ताव पर प्रदेश सरकार ने 23 लाख 84 हजार रुपए जारी किया था। इस राशि से नगर पालिका ने पार्क में लोहे के पुल के साथ नया हाई मास्ट लाइट लगाने के अलावा घास लगाने के साथ ही फौव्वारे का निर्माण, तालाब किनारे बने हुए रेलिंग के दीवारों पर लाइट लगाया गया। लाेगों को उम्मीद थी कि इसके बाद सती उद्यान पार्क का सौंदर्य और अधिक आकर्षक होगा। साथ ही आम लोग पहले की तरह शाम का वक्त इस पार्क में गुजार सकेंगे। पर तीन साल बाद भी पार्क की स्थिति जस की तस बनी हुई है।
तालाब के अस्तित्व पर भी खतरा
यह पार्क चारों ओर से तालाब से घिरा हुआ है। यह शहर के लोगों के निस्तारी का एक महत्वपूर्ण साधन है, लेकिन गंदगी और कचरे से इस तालाब का अस्तित्व भी खतरे में है। समय-समय पर इस तालाब का जनसहयोग से गहरीकरण और सफाई किया गया था। तालाब की नियमित सफाई नहीं होने से स्थिति एक बार फिर जस की तस हो गई है। पार्क के प्रांगण स्थित कम्युनिटी हाल में होने वाले वैवाहिक कार्यक्रम सहित अन्य गतिविधियों से निकलने वाले कचरे को लापरवाहीपूर्वक इसी तालाब में डाल दिया जाता है। साथ ही आसपास रहने वाले व्यवसायी और रहवासियों भी इस तालाब का उपयोग कचरा डालने के लिए कर रहे हैं। अगर समय रहते लोग नहीं चेते, तो यह तालाब अपना अस्तित्व खो सकता है।
फंड आते ही तालाब का सौंदर्यीकरण कराएंगे
“रानी सती उद्यान के सौंदर्यीकरण के लिए वर्तमान में कोई फंड नहीं है, फंड आते ही सौंदर्यीकरण के साथ साथ बच्चों के मनोरंजन के लिए झूले भी लगाएं जाएंगे।”
–बसंत बुनकर, सीएमओ, नगर पालिका जशपुर
साभार: दैनिक भास्कर

