बिलासपुर. भनवारटंक से रेस्क्यू किए गए आदमखोर भालू की इलाज के दौरान गुरुवार को रात 9 बजे मौत हो गई। भालू की मौत की वजह वन विभाग के अफसर उसे रैबीज संक्रमित होना बता रहे हैं। पोस्टमार्टम के बाद भालू का अंतिम संस्कार कर दिया गया है। वन विभाग के अफसरों ने भालू के ब्रेन का कुछ हिस्सा जांच के लिए इज्जतनगर बरेली भेजा है। भनवारटंक के आदमखोर भालू को कटघोरा वनमंडल से रेस्क्यू कर भनवारटंक के जंगलों में छोड़ा गया था जहां उसने 22 दिसंबर को गुजरने वाले बाइक सवारों पर हमला कर दिया था। आक्रमण में कृष्णा नाम के एक वृद्ध ग्रामीण की मौत हो गई थी। इसके बाद भी भालू वहीं घूम रहा था। वन विभाग के अफसरों ने इसकी सूचना मुख्य वन संरक्षक कार्यालय को दी। विभाग से रेस्क्यू टीम के वहां पहुंचने तक सुबह से शाम तक भालू उसी जगह पर बैठा रहा। उसे ज्यादा गतिविधि नहीं करते देख वन विभाग की रेस्क्यू टीम को उसके बीमार होने की आशंका हुई। रेस्क्यू टीम ने भालू को रखने के लिए वाहन में केज भी रखा था। भालू को केज में रखकर गौरेला रेंज की स्थानीय नर्सरी में लाकर कानन के डाॅ. अजित पांडे ने इलाज करना शुरू किया। 24 दिसंबर के दोपहर से उसे उसकी हालत खराब होती गई और रात 9 बजे मौत हो गई।
रैबीज फैलने की आशंका से नर्सरी में हुआ इलाज
डीएफओ मरवाही राकेश मिश्रा के मुताबिक भालू जिस तरह व्यवहार कर रहा था उसे रैबीज संक्रमण की आशंका थी। इसी वजह से उसे कानन पेंडारी न लाकर गौरेला रेंज की नर्सरी में इलाज किया गया। यदि रैबीज संक्रमण होता तो कानन में अन्य वन्य प्राणियों में भी यह फैल सकता था।
साभार: दैनिक भास्कर

