सक्ती से 24 किलोमीटर दूर पहाड़ों के बीच बसा गांव बन सकता है पर्यटन स्थल
सक्ती. नगर से 24 किमी दूर पहाड़ों के बीच बसा है रेनखोल। चारों ओर से पहाड़ी से घिरा होने व तलहटी में बसने के कारण यह गांव ऊपर से किसी बड़े कटोरा की तरह दिखाई देता है। सचिव नीतेश गबेल और सरपंच संतराम सिदार ने बताया कि पहाड़ी की ऊंचाई करीब 4000 मीटर है, इसलिए यहां पूर्व से जब सूर्याेदय होता है तो लगभग आधा घंटा देरी से नजर आता है। वहीं शाम को सूर्यास्त भी समय से पहले होने का एहसास होता है। दैनिक भास्कर की टीम जब शाम 4:30 बजे रेनखाेल पहुंची तो अंधेरा बहुत अधिक तो नहीं था, लेकिन वहां से पहाड़ों की ओट में छुप जाने के कारण सूरज दिखाई नहीं दे रहा था। रेनखोल गांव का भौगोलिक क्षेत्रफल 97.64 हेक्टेयर है। यहां मात्र 104 घर हैं जहां रहने वालों की संख्या मात्र 352 है। पहाडिय़ों की गोद में बसे गांव रेनखोल 2018 से जिले का पहला ऊर्जा दक्ष आदर्श गांव बन गया है। वर्ष 2018 में इस गांव में आजादी के बाद पहली बार बिजली क्रेडा द्वारा लगाए गए सोलर प्लांट से पहुंची। अब इस गांव में बिजली पहुंच गई है। ग्रामीण एलईडी बल्ब और पंखे का उपयोग कर बिजली की बचत कर रहे हैं। पहाड़ी कोरवा जनजाति के लोग यहां निवास करते हैं। चारों तरफ की प्राकृतिक सुंदरता लोगों का मन मोह लेती है।
पर्यटन के लिए कर सकते हैं विकसित
पहाड़ियों से घिरे रेनखोल को पर्यटन के लिए विकसित हो सकता है। यहां पहुंचने के लिए पहले ट्रेन या दूसरे साधन से सक्ती पहुंचना होगा। इसके बाद बाई रोड ही रेनखोल तक पहुंचा जा सकता है। सक्ती से कोरबा रोड में दमऊधारा से यहां पहुंचा जा सकता है। इससे दमऊधारा तक भी पर्यटक पहुृंच सकते हैं व रेनखोल भी। यहां वे जंगल सफारी का आनंद ले सकते हैं।
साभार: दैनिक भास्कर

