अंकिरा. कोरोना काल में लंबे समय तक हाट बाजार बंद रहे। इससे दैनिक उपयोग की सामग्रियों के लिए भी लोगों को भटकना पड़ा। सब्जी की खरीदी करने के लिए भी कई बार भटकना पड़ा। ग्रामीणों को सब्जी लेने में हो रही परेशानी को देखते हुए लोक सेवा केंद्र के एक कर्मी ने खेती करने का प्लान बनाया और अपनी बंजर जमीन पर मेहनतकर उसे उपजाऊ बनाया और महज 4 माह में ही सब्जी की खेतीकर 75 हजार रुपए कमा लिए।
लॉकडाउन के दौरान लोग घरों में ही बंध कर रह गए थे। इस दौरान कई लोग घरों में ही रहते हुए कई नए नए कार्य करने की योजना बना रहे थे,तो कई लोग अपने पुराने कामों को छोड़कर नए काम शुरू कर दिए। लॉकडाउन के दौरान फरसाबहार विकासखंड के ग्राम पंचायत कोंरगामाल के आश्रित ग्राम भालुमुण्ड़ा निवासी मेघराज भी घर में ही रहने को मजबूर हो गए। कुछ दिनों तक घर में रहने के दौरान उसने सब्जियों की मंहगाई और हाट बाजार बंद हो जाने से ग्रामीणों को हो रही परेशानी को देखते हुए उसने खेती करने की सोची और अपने डेढ़ एकड़ के जमीन में खेतीकर अच्छी खासी कमाई कर ली।
11 हजार रुपए से शुरू की थी खेती – मेघराज ने बताया कि लॉकडाउन के दौरान वह एक बार पत्थलगांव की ओर गया था। रास्ते में उसने देखा कि जिस स्थानों में लोग टमाटर की खेती करते थे उस स्थान पर लोगों ने मक्के की खेती की गई थी। इसके साथ ही उसके पूरे गांव में कोई टमाटर की खेती नहीं करता है।
मेहनत कर बंजर जमीन को बनाया उपजाऊ
मेघराज यादव ने लोगों को सब्जी के लिए हो रही परेशानी को देखते हुए पड़ती भूमि में ही खेती करने का प्लान बनाया था। मेघराज ने 15 अगस्त से पड़ती भूमि में खेती शुरू कर दी थी। उसके डेढ़ एकड़ भूमि में वर्षों से किसी प्रकार की कोई भी खेती नहीं हो रही थी। उस भूमि का चयन करते हुए उसने अपनी मेहनत से अपने बंजर पड़े हुए जमीन को हरा भरा कर दिया। उसने डेढ़ एकड़ टमाटर के पौधे लगाए और मात्र 4 महीने में ही अपनी फसल को बेचकर उसने 75 हजार रुपए की आमदनी कर ली।
साभार: दैनिक भास्कर

