कर वसूली पर ध्यान दें तो वर्ल्ड बैंक से आर्थिक मदद की जरूरत ही नहीं पड़ेगी
वर्ल्ड बैंक जिले के जलाशयों के लिए देगा लगभग 21 करोड़ रुपए
रायगढ़. राजस्व बढ़ाने के लिए शासन ने भले ही नजूल जमीन की नीलामी शुरू की है लेकिन कुछ विभाग जरूरी कर की वसूली नहीं कर रहे हैं। जिले का जल संसाधन विभाग लक्ष्य का 28 प्रतिशत ही वसूल पाया है। 72 फीसदी राशि यानि लगभग 140 करोड़ रुपए की वसूली नहीं हो सकी है। जिले के उद्योगों पर करोड़ों रुपए का बकाया है, कुछ मामले कोर्ट में विचाराधीन हैं। अगर ये राशि मिल जाए तो न केवल जिले के 4 डेम की मरम्मत हो जाएगी बल्कि कुछ नहरें भी बन जाएंगी। केंद्र वर्ल्ड बैंक प्रदेश के कुछ जलाशयों को सुधारने के लिए आर्थिक सहायता करेगा उसमें जिले को लगभग 21 करोड़ रुपए मिलेंगे। कुछ दिनों पहले ही केंद्र की टीम ने आकर निरीक्षण किया था। दूसरी तरफ विभाग सालों से अपने बकाएदारों से लगभग 140 करोड़ रुपए की राशि वसूल नहीं कर पा रहा है। विभाग चाहे तो अपने बकायादारों से वसूली करके ही सभी जलाशयों की मरम्मत करने के साथ नए जलाशय भी बना सकता है। इतना ही नहीं वर्ल्ड बैंक से आर्थिक मदद की जरूरत ही नहीं पड़ेगी।
कर वसूली पर चार उद्योगों के मामले चल रहे कोर्ट में
सबसे बड़े बकायदारों में चार ऐसे उद्योग हैं जिनके कर संबंधित मामले कोर्ट में विचाराधीन है। कोर्ट के आदेश के बाद तय होगा कि उनके कितनी वसूली होनी है। दो प्रकरणों में उच्च न्यायालयों से स्थगन आदेश मिल चुका है। दरअसल विभाग ऐसे मामलों में अपना पक्ष मजबूती से नहीं रख पाता जिसके कारण कई सालों तक इसका निराकरण भी नहीं हो पाता है।
जिले के 6 बंद उद्योगों पर 20 करोड़ रुपए बकाया
विभाग को 6 ऐसे उद्योगेां से भी 20 करोड़ के लगभग वसूलने हैं और वे बंद हो चुके हैं। इनमें से महज एक ही उद्योग को आरआरसी जारी किया गया है। बाकी उद्योगों को केवल नोटिस भेजा जा रहा है। काम चालू करने के दौरान उद्योगों ने पानी का इस्तेमाल किया। लेकिन अब उद्योग बंद होने का बहाना देकर भुगतान करने से इनकार कर दिया है।
रायगढ़ में गैर अनुबंधित उद्योग सबसे ज्यादा
रायगढ़ डिविजन में 44 अनुबंधित और गैर अनुबंधित उद्योग हैं। इनसे विभाग हर महीने करोड़ों रुपए वसूली करता है। 20 उद्योग ऐसे हैं जिन्होंने विभाग से कोई अनुबंध ही नहीं किया है। ये सालों से इसी तरह पानी की चोरी कर रहे हैं। इनमें कई बड़े उद्योगों के नाम शामिल हैं। जबकि एग्रीमेंट कराने पर इन्हें राशि कम देनी होगी। लेकिन विभाग की कमजोर इच्छाशक्ति के कारण कोई भी अनुबंध कराने को तैयार नहीं है।
कोर्ट में विचाराधीन, ज्यादा रिकवरी की कोशिश
“कुछ उद्योगों से संबंधित मामले कोर्ट में विचाराधीन है। इस कारण वसूली में परेशानी हो रही होगी। बाकी हमारी कोशिश यही होती है कि ज्यादा से ज्यादा रिकवरी कर पाएं।”
-अजय सोमावार, चीफ इंजीनियर, बिलासपुर
साभार: दैनिक भास्कर

