बाहर की मंडियों में 4 गुना कीमत पर बिकता है कटहल इसलिए डिमांड ज्यादा
लोकल में कुछ दिन बाद ही गिर जाएंगे दाम
जशपुर. कटहल के पेड़ों पर फल आने शुरू हो गए हैं। इसके साथ ही बिचौलिए गांव-गांव में सक्रिय हो गए हैं जो कि किसानों से पेड़ सहित पूरा फल खरीद ले रहे हैं। अभी किसान महज 5 से 10 हजार में पेड़ सहित कटहल बेच दे रहे हैं।
जब कटहल बड़ा हो जाएगा तो बिचौलिए इसे तुड़वाकर गाड़ियों में लोड कर सीधे यूपी व बिहार की मंडियों में ले जाएंगे। जहां यह कटहल 80 से 100 रुपए किलो के दाम पर बिकेगा। अभी लोकल मंडी में कटहल की आवक शुरू हो गई है। अभी लोकल मंडी में भी कटहल 70 से 80 रुपए किलो में मिल रहे हैं। पर जब कटहल की आवक बढ़ेगी तो अचानक से दाम गिर जाएंगे। फिर 10 से 20 रुपए प्रति नग की दर पर कटहल बिकेगा। एक कटहल का वजन 2 से 3 किलो तक हाेता है।
बीते साल लॉकडाउन के कारण कटहल बाहर की मंडियों में नहीं जा पाया था। इससे कटहल के दाम किसानों को नहीं मिले थे। पर इस बार एेसी कोई बंदिश नहीं है। इसलिए बिचौलिए कटहल से मुनाफे के कारोबार में फिर से जुट गए हैं। जशपुर का कटहल झारखंड, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, बंगाल और बिहार की मंडियों में जाता है। व्यापारी जशपुर क्षेत्र से पेड़ों से कटहल को तोड़कर दूसरे राज्यों की मंडियों में ले जाते हैं। बिहार के गया, पटना, औरंगाबाद, उत्तर प्रदेश के बनारस, इलाहाबाद आदि मंडी में कटहल का भरपूर दाम मिलता है।
मजबूरी का भरपूर लाभ बिचौलिए उठा रहे हैं। कटहल का उपयोग क्षेत्र में लोग सब्जी व फल दोनों ही रूप में करते हैं। कच्चे कटहल की जायकेदार सब्जी बनती है, तो पका हुआ कटहल मीठा होता है। इसके अलावा पके कटहल के बीजों का उपयोग भी क्षेत्र में किया जाता है। पके कटहल के बीजों से पाचक बनाया जाता है। इसके अलावा कटहल का अचार बनाकर लोग इसे घरों में संग्रहित करके भी रखते हैं।
कमाई नहीं… 600 हेक्टेयर में 8 टन उत्पादन
उद्यान विभाग के आंकड़ों के मुताबिक बीते 3-4 सालों से करीब 600 हेक्टेयर भूमि पर कटहल का उत्पादन हो रहा है, जिसमें 8 हजार मीट्रिक टन कटहल प्राप्त होता है। इस साल भी इतने ही कटहल उत्पादन की संभावना है। कटहल का उत्पादन तो भरपूर हो रहा है पर इसका लाभ उत्पादक किसान नहीं उठा पा रहे हैं। किसानों के लिए ऐसा कोई संगठन काम नहीं कर रहा है जो उनके कटहल को बाहर के बाजार में बेचकर सही दाम दिला सके।
साभार: दैनिक भास्कर

