पार्क में सुविधा के नाम पर कुछ भी नहीं बचा, बुजुर्गों के लिए भी बैठने की व्यवस्था भी नहीं
जशपुर. जिला बने 22 साल हो चुके हैं पर अब तक शहर में बच्चों के मनोरंजन के लिए कोई खास व्यवस्था नहीं हो पाई है। बच्चों के लिए शहर में सिर्फ एक ही बालोद्यान है। एक साल से उसकी हालत भी खराब है। बच्चों के लिए पर्याप्त झूले भी नहीं हैं, जो हैं वे भी टूट फूट चुके हैं। शहर के बाला साहब देशपाण्डेय चौक के पास स्थित बालोद्यान में बच्चों के लिए खेलने के लिए नाममात्र के झूले रह गए हैं। यहां दो फिसलपट्टी, तीन झूले और छोटे बच्चों के लिए एक राउंड झूला लगा था। अब इनमें सिर्फ तीन झूले ही सही सलामत है। दोनों फिसलपट्टी में छेद हो चुके हैं। पार्क जाने वाले बच्चे इन फिसलपटि्टयों में झूले बिना रह नहीं पाते हैं। फिसलपट्टी की छेद में पांव फंसने वे घायल हो जा रहे हैं। एक साल पहले भी पार्क की स्थिति यही थी। उस वक्त पालिका के अधिकारियों ने कहा था कि प्रस्ताव भेजा गया है। जैसे ही राशि स्वीकृत होती है, नए झूले लगाए जाएंगे। पर एक साल बीतने के बावजूद पार्क की स्थिति में कोई सुधार नहीं हो पाया है। मां-बाप बच्चों को घुमाने के लिए पार्क तो ले जाते है,ं लेकिन यहां किसी भी तरह की सुविधा ना देख मायूस होकर लौटते हैं। टूटे झूले में हादसा होने का भी डर है।
रानी सती पार्क की हालत भी खराब
शहर में रानीसती तालाब में तालाब के बीच टापू में एक पार्क बनाया गया है,पर इस पार्क की हालत भी अब खराब हो चुकी है। पार्क में बैंच पर्याप्त मात्रा में नहीं लगे हैं। पार्क मेंटनेंस के लिए सिर्फ यहां लगे घास को हरा रखने का काम किया जा रहा है। पहले इस पार्क में भी बच्चों के लिए झूले लगे थे, पर अब झूले वाली जगह को खाली करा दिया गया है।
बेंच भी टूटे-फूटे, बुजुर्गों के लिए कोई जगह नहीं
पार्क में सुकूनभरे कुछ पल बिताने के लिए बुजुर्गों के लिए हरे घास व बैंच की व्यवस्था की गई थी। लेकिन अब पार्क के बैंच टूट चुके हैं। बैठने के लिए सिर्फ घास बची हैं। इस पार्क का उपयोग वर्तमान में सिर्फ इवनिंग वॉक के लिए ही हो रहा है। पार्क के बीचों बीच स्थित तालाब के चारों ओर लगे पेवर ब्लॉक वाली सड़क पर लोग टहलते हैं।
नए चिल्ड्रन पार्क की योजना ठंडे बस्ते में
पालिका ने नए चिल्ड्रन पार्क का भी प्रस्ताव तैयार किया है। एक बार इसके लिए करीब 5 करोड़ रुपए की स्वीकृति भी मिल चुकी थी, पर जमीन तय नहीं होने के कारण यह पैसे सरकार के पास वापस चले गए। पालिका द्वारा चिल्ड्रन पार्क के लिए बांकी नदी के किनारे गम्हरिया रोड में वनश्री के पास भूमि का चयन किया था, पर काम शुरू नहीं कराया।
तालाब का पानी सूखा सुंदरता भी हुई गायब
बालोद्यान पार्क के बीचों बीच स्थित तालाब सूख गया है। इससे पार्क की सुंदरता बिगड़ गई है। तालाब में गहरीकरण की जरूरत है। यदि तालाब का गहरीकरण करा दिया जाता तो तालाब में पानी कभी नहीं सूखेगा। पार्क के भीतर स्थित इस तालाब में नौकाविहार और फ्लाईओवर की सुविधा कराने पर इस पार्क की सुंदरता में चार चांद लग जाएंगे। पर आबंटन की कमी के कारण ऐसी कोई व्यवस्था नहीं हो पा रही है।
निर्माण के लिए सरकार से नहीं आ रहा पैसा
बताया जाता है कि राज्य सरकार से पालिका को फंड जारी नहीं हो पा रहा है। इस वजह से शहर के विकास कार्य रुके हुए हैं। शहर के बाला साहब देशपाण्डेय पार्क में नए झूले लगाने, बैंच लगाने, तालाब के चारों ओर टॉय ट्रेन लगाने, जिम लगाने व सौन्दर्यीकरण के लिए पालिका द्वारा एक साल पहले ही प्रस्ताव बनाकर भेजा जा चुका है। पर इस प्रस्ताव को मंजूरी नहीं मिल पाने के कारण पार्क में सुविधाओं का विस्तार नहीं हो पा रहा है।
ओपन जिम की मशीनें खराब
पार्क में बड़ों के लिए ओपन जिम के सामान लगाए थे। एक साल बाद ही जिम की अधिकांश मशीनें खराब हो चुकी है। अब ओपन जिम वाले स्थान पर कुछ ऐसा नहीं जहां लोग ठहर सकें। जिस वक्त जिम लगा था, उस वक्त बड़े भी व्यायाम करने के लिए पार्क में आते थे। जिम की मशीनों के रख-रखाव में कोई ध्यान नहीं दिया गया। कलपुर्जों की ग्रिसिंग नहीं की गई। लॉकडाउन के दौरान जब पार्क लंबे समय तक बंद रहा तो मशीनों में जंग लग गया और कलपुर्जे अलग होकर खराब हो गए।
प्रस्ताव भेजा है, राशि स्वीकृत होने के बाद होगा काम
“पालिका के पास फंड की कमी है।बालोद्यान में नए झूले लगाए, टॉय ट्रेन सहित अन्य सुविधाओं का विस्तार किया जाना है। इसके लिए प्रस्ताव बनाकर भेजा है। जैसे ही राशि स्वीकृत होती है काम शुरू कर दिया जाएगा।”
-बसंत बुनकर, सीएमओ, नगरपालिका।
साभार: दैनिक भास्कर

