20 लाख क्विटल समिति व संग्रहण केंद्रों में जाम, डीओ व टीओ भी नहीं कर रहे जारी
रायगढ़. धान का उठाव नहीं होने से सोसाइटी प्रबंधक डरे हुए हैं। खरीदी 10 दिन पहले पूरी हो चुकी है उसके बाद भी समितियों में धान डंप है। 110 सोसाइटियों में करीब 20 लाख क्विंटल धान पड़ा है। सोसाइटी प्रबंधकों को धान के सूखने से नुकसान का डर सता रहा है। इसके साथ ही चूहे से नुकसान और चोरी की भी आशंका होती है। पहले मई तक उठाव चलता था, सोसाइटी प्रबंधकों को ऐसी चिंता नहीं होती थी लेकिन अब धान की शॉर्टेज पर एफआईआर और गिरफ्तारी से घबराहट है। उठाव जल्द हो इसलिए 32 सोसाइटी के संचालक हाईकोर्ट पहुंचे हैं, अगले दो-चार दिन में बाकी समितियां भी जाएंगी।
इस सीजन में 53 लाख क्विंटल धान खरीदा गया है। अभी संग्रहण केन्द्रों में सात लाख और सोसाइटियों में 20 लाख क्विंटल धान पड़ा है। पिछले वर्षों तक धान का उठाव फरवरी के दूसरे सप्ताह से होता था लेकिन इस बार विपणन विभाग ने डीओ और टीओ को काटना भी बंद कर दिया है।सोसाइटी संचालको कहना हैं कि एक बोरे में 40 किलो धान भरा जाता है, उसमें 14-17 फीसदी तक नमी रहती है। खरीदी के बाद लंबे अरसे तक धान खुले में पड़ा रहे तो धूप के कारण धान में सूखत आती है। एक सोसाइटी में 500 क्विंटल धान तक शॉर्ट हो जाता है। हालांकि इसी सूखत के नाम पर हर साल गड़बड़ी भी होती है। खरीदी के दौरान एक बोरे में एक-दो किलो अधिक धान लेने की शिकायतें भी आती रही हैं। जो भी नुकसान होता है उसकी वसूली समिति से होती है। इससे बचने के लिए ही उठाव जल्दी कराने समिति प्रबंधक हाईकोर्ट जा रहे हैं।
फैक्ट फाइल
जिले में 53 लाख क्विंटल धान खरीदी
26 लाख क्विंटल धान मिलर्स ने लिया
7 लाख क्विंटल धान संग्रहण केन्द्र में भेजा जा चुका है।
सोसाइटियों में 20 लाख क्विंटल धान जाम
उसना चावल का उठाव
सोसाइटी संचालक संघ के सचिव युगल किशोर पटेल ने बताया कि अभी मार्कफेड से उसना चावल के उठाव के लिए डीओ काटा जा रहा है। इसमें खरीदी 10 फीसदी होती है। सबसे ज्यादा 90 फीसदी खरीदी अरवा धान की होती है। लेकिन इसके उठाव के लिए कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है, इसलिए हम कोर्ट गए है।
मिलर्स ने भी कही नुकसान की बात
मिलर्स एसोसिएशन से दीपक अग्रवाल बताया कि इस बार धान खरीदी होने के बाद ब्रोकन (कनकी) ज्यादा निकल रही है। धान खरीदी होने के बाद चावल बनाने के लिए 50-50 फीसदी तक चावल और ब्रोकन में अंतर है। मिलर्स को उठाए गए धान का 67 फीसदी तक का चावल देना होता है, ऐसे में जो ब्रोकन निकल रहे है उसमें 17 फीसदी तक का नुकसान मिलर्स को उठाना पड़ रहा है। अब मिलर्स भी टेस्ट मिलिंग कराने की मांग कर रहे हैं, दूसरे राज्यों में यह व्यवस्था है।
उठाव पर शासन के जल्द फैसले की है उम्मीद
“जिले की सोसाइटियों में धान उठाव को ले करके कोई फैसला नहीं हुआ है, इसपर फैसला राज्य स्तर पर होना है। राज्य स्तर पर इसकी बैठकों में इसकी चर्चा हो रही है। जल्द ही इसका फैसला हो जाने की उम्मीद की जा रही है, स्थानीय स्तर पर भी हम सोसाइटियों संचालकों से बातचीत की है।”
-एसके गुप्ता, डीएमओ
साभार: दैनिक भास्कर

