केलो कपूत शिव राजपूत की चिट्ठी केलो के नाम..
भारत मे आपात काल लागु कराने….
केलो आई काश. मैने एल. एल. बी. की पढाई पूरी करी होती और काश मैने लेखन के बजाय फालतु कामो के बजाय पैसे कमा लिया होता तो आज माननीय सर्वोच्च न्यायालय याचिका दायर करता
कि आजादी के बाद देश एक ऐसी त्रासदी के दौर से गुजर रहा है जिसमे सभी सरकारें बुरी तरह नाकाम और लाचार हो गयी हैं अपनी असफलताओं को छिपाने लाकडाउन जैसी कई तरकीबें आजमाने के बावजूद कोरोना और कोरोना से उपजे बदहाली नियंत्रण से बाहर होती जा रही है और सहज जीवन जीना दूभर होता जा रहा है
ऐसा भी नहीं है कि सभी राज्य व केन्द्र की सरकार हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं बल्कि राहत और बचाव की भरपूर कोशिश भी की जा रही है राजनैतिक तूतू.. मैमै से ईतर इमानदारी से देखें तो परिणाम शिफर है
भय. भूख और भ्रांति से और करोना की मार से जनता त्रस्त है
प्रशासन को मजबूरी मे सरकार की जीहजूरी से फुर्सत नहीं है बार बार लाकडाउन की तारीखें बढाकर झूठा साबित हो रही है सो अलग है
ऐसे मे केलोआई मेरा बस चले तो देश मे आपातकाल लागू करने मा. न्यायालय का दरवाजा जरूर खटखटाता
लोगोँ का भरोसा न जाने किस कस पर से उठना बाकी है पर मा.न्यायालय पर भरोसा तो है
केलोआई कहासुना माफ करना मन मे आये तो समर्थन देना वरना कोई बात नहीं।

