सुनील रामदास डामर प्लांट उड़ा रहा है नियमों की धज्जियां
काले धुएं से परेशान हैं ग्रामीण
टिमरलगा से गुजरना है तो हो जायें सावधान ! क्योंकि यहाँ उठता है सुनील रामदास का काला धुँवा
जिला मुख्यालय से करीबन 20 किमी दूर ग्राम टिमरलगा में बीच बस्ती स्थापित किए गए सुनील रामदास डामर प्लांट से राहगीरों समेत ग्रामीणों की परेशानी बढ़ गई है। ग्राम पंचायत टिमरलगा में संचालित किए जा रहे सुनील रामदास डामर प्लांट से निकलने वाली जहरीली धुंआ लोगों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है। ठंड और गर्मी के मौसम में प्लांट के काले धुएं से आसपास काली धुंध बन रही है। इससे लोगों को सांस लेने में काफी दिक्कत हो रही है। प्लांट से उठ रहे धुएं के चलते डस्ट आकर खान – पान , बर्तन एवं कपड़ों पर काला किट जम जाता है । वही गांव वालों ने कई बार प्लांट मैनेजर से इसकी शिकायत भी की है ।
जिले में अवैध डामर प्लांट धड़ल्ले से संचालित किये जा रहे हैं । जिले में संचालित डामर प्लांट विभाग के नियमों को भी ताक पर रखकर कार्य कर रहे हैं । टिमरलगा पंचायत में सारंगढ़ जाने वाले मार्ग में अवैध डामर प्लांट लगा हुआ है । प्लांट के कारण गांव के आसपास के लोग पूरी तरह से असुरक्षित हो चुके हैं । ग्रामीणों के स्वास्थ्य पर खतरा मंडराने लगा है । साथ ही पर्यावरण को भी भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं , क्योंकि इनका कोई मानक स्तर तय नहीं है । इसके बाद भी कोई कार्यवाही नहीं होती है।
पर्यावरण के लिए काफी नुकसानदायक
सुनील रामदास डामर प्लांट के कारण पर्यावरण को काफी नुकसान पहुंचता है। डामर प्लांट से निकलने वाले धुँए के कारण आसपास के क्षेत्र में रहने वाले के घरों में जैसे अंधेरा छा जाता है । जहरीले धुएं का सबसे ज्यादा असर बच्चों पर पड़ता है। इसकी चपेट में आने से बच्चों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। एक तरफ जिला प्रशासन लगातार सुपोषण अभियान चलाकर बच्चों को प्रोटीन पोषण आहार देकर महिलाओं और बच्चों को सुपोषित कर रही है । वही सुनील रामदास डामर प्लांट से निकलने वाले धुएं के कारण कई तरह की बीमारियों के साथ ही कुपोषण भी फैल सकता है।
पक्षियों पर बुरा असर-
डामर प्लांट का असर पक्षियों पर ज्यादा देखा जा सकता है । ग्रामीणों की माने तो जिन स्थानों पर प्लांट लगाए गए हैं , उनके आसपास स्थानीय पक्षियों की संख्या नगण्य हो चुकी है । प्लांट लगने के बाद पक्षियों की गूंज सुनाई नहीं देती प्लांट के आसपास पशु और पक्षी नजर ही नहीं आते।
सुनील रामदास प्लांट मार्ग किनारे स्थित
यह डामर प्लांट मुख्य मार्ग के किनारे स्थित है । इस प्लांट पर सभी की नजर पहुंचती है , लेकिन आज पर्यन्त तक किसी ने भी कार्यवाही क्यों नहीं की ? यह तो जांच का विषय है।
गांव में मचा हुआ हंगामा
बताया जा रहा है कि प्लांट सुबह 3 बजे से प्रारंभ हो जाता है और रात तक यहां पर काम चलते रहता है। जिला मुख्यालय से मात्र 20 किमी दूर ग्राम टिमरलगा में स्थापित सुनील रामदास डामर प्लांट को लेकर ग्राम पंचायत टिमरलगा में हंगामा मचा हुआ है। टिमरलगा के ग्रामीण प्लांट से फैल रहे ध्वनि एवं वायु प्रदूषण का हवाला देते हुए प्लांट को बंद करने की मांग कर रहे है। वहीं ग्रामीणों ने बताया है कि डामर प्लांट के चलते उनके गांव वालों का जीवन खतरे में पड़ गया है। ग्रामीणों ने अतिशीघ्र उक्त डामर प्लांट को बंद कराने की मांग रखी है। वही बता दें कि डामर प्लांट से लगे रोड के किनारे एक तालाब स्थित है , जिसमें टिमरलगा के पूरी बस्ती नहाने के लिए उसी तालाब में जाते हैं । उस तालाब में तो सुनील रामदास डामर प्लांट से निकलने वाली जहरीली और काली धुँवा का साया है । जिससे उस तालाब का पानी प्रदूषित हो रहा है । लेकिन शासन-प्रशासन है कि इस और ध्यान ही नहीं दे रहा है । क्या एक बड़ा ठेकेदार का डामर प्लांट होने से कोई अधिकारी यहां पर कार्यवाही नहीं करने की कसम खा रखे हैं ? प्रदूषण विभाग भी मौन धारण किए बैठे हैं , जिससे प्रदूषण विभाग के ऊपर किया उंगलियां उठ रही है । लेकिन प्रदूषण विभाग के अधिकारी जो हैं घोड़े बेच के सो रहे हैं और यहां के डामर प्लांट को खुली छूट दे रखी है । इसीलिए तो आज तक कार्यवाही के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति ही हो रही । अब देखना लाजमी होगा कि शासन प्रशासन इस ओर ध्यान देता है या फिर इसको अभयदान दे दिया जाता है ।

