देश व समाज सेवा के क्षेत्र में योगदान देने वाले 20 विशिष्टजनों का किया जाएगा सम्मान
रायगढ़। इस साल भी शहीद भगत सिंह ब्रिगेड की जिला इकाई की ओर से 28 सिंतबर को शहीदे-आजम भगत सिंह की जयंती मनाई जाएगी। इस अवसर पर देश व समाज सेवा के क्षेत्र में योगदान व विशिष्ट उपलब्धि पर 20 विशिष्टजनों का सम्मान किया जाएगा।
शहीद भगत सिंह ब्रिगेड के जिलाध्यक्ष कमल शर्मा ने बताया कि हमारी संस्था की ओर से शहीद भगत सिंह की जयंती व पुण्यतिथि हर साल मनाई जाती है। इस अवसर पर संगोष्ठी, सम्मान समारोह सहित अन्य आयोजन किए जाते हैं। इस साल भी हमारी संस्था द्वारा 28 सितंबर को सुबह 11 बजे शहीद भगत सिंह की जयंती पर शहीद चौक स्थित उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण व पुष्पांजलि अर्पित की जाएगी और देश की आजादी में उनके योगदान व बलिदान को याद करते हुए उन्हें नमन किया जाएगा। इस मौके पर देश व समाजसेवा के क्षेत्र में लगे लोगों को सम्मानित भी किया जाएगा। इस साल हमारी संस्था की ओर से 20 विशिष्टजनों को सम्मानित करने का निर्णय लिया गया है, जो देश सेवा व समाजसेवा के क्षेत्र में योगदान दे रहे हैं। इनमें देश की रक्षा के लिए शहीद हुए जवानों के परिजनों को भी उनके निवास स्थान पर जाकर सम्मानित किया जाएगा। उन्होंने शहरवासियों से कार्यक्रम में उपस्थित होकर शहीद भगत सिंह को श्रद्धासुमन अर्पित करने की अपील की है।
श्री शर्मा ने बताया कि 28 सितंबर सन 1907 को बंगा गांव, जिला लायलपुर, पंजाब प्रांत (वर्तमान पाकिस्तान) में एक क्रांतिकारी परिवार पिता सरदार किशन सिंह और माता विद्यावती कौर के यहाँ भगत सिंह का जन्म हुआ था। जिस दिन भगत सिंह का जन्म हुआ था, उसी दिन उनके चाचा अजीत सिंह और स्वर्ण सिंह जेल से रिहा हुए थे। उनके घर में दादा, पापा चाचा सभी क्रांतिकारी विचारधारा वाले थे। इसका प्रभाव भगत सिंह पर भी पड़ा और वे आगे चलकर एक क्रांतिकारी बन गए। जलियांवाला बाग हत्याकांड से भगत सिंह सबसे ज्यादा दुखी और प्रभावित हुए। वे महज 12 साल की उम्र में, स्कूल की छुट्टी होने के बाद, 20 किलोमीटर पैदल चलकर, जलियांवाला बाग पहुंचे और वहां से उस रक्त से सनी हुई मिट्टी को एक बोतल में भर कर घर ले आए। उसे मंदिर में रखकर रोज उसकी पूजा करते थे। भगत सिंह और उनके साथी बटुकेश्वर दत्त ने नेशनल असेंबली, दिल्ली में, 8 अप्रैल 1929 को भरी सभा में बम फेंके। इसका उद्देश्य अंग्रेजों द्वारा भारतीयों पर हो रहे अत्याचारों को विश्व के सामने लाना था। इस मामले में 26 अगस्त सन 1930 को कोर्ट ने कानूनी तौर पर भगत सिंह को अपराधी करार दिया। कानूनों के मुताबिक 24 मार्च 1930 को सुबह फांसी का समय था। लेकिन अंग्रेज अधिकारियों को डर था कि, भारतीय जनता कहीं आंदोलन ना कर दे. इस कारण कानून को तोड़कर 23 मार्च की शाम को ही भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को फांसी दे दी गई।

