जशपुर. कुनकुरी वनपरिक्षेत्र के गांवों के खेतों में 30 हाथियों का दल बर्बाद कर रहा है तैयार फसल, विभाग से नहीं मिल रही मदद इसलिए नुकसान से बचने के लिए किसान कर रहे हैं तरह-तरह के उपाय.
क्षेत्र में हाथियों की मौजूदगी से किसान परेशान हैं। उन्हें फसल के खराब होने चिंता सता रही है। ऐसे में वे पेड़ों पर रतजगा करने को मजबूर हैं। जशपुर जिले के कुनकुरी ब्लाक के गांवों के पेड़ों पर ग्रामीणों ने मचान बना लिए हैं। ब्लाक के ग्राम पंचायत कुड़ेकेला व जामचुआं में किसानों के उड़द, मूंगफली और धान की फसलों काे हाथियों द्वारा नुकसान पहुंचाया जा रहा है। ग्रामीणों के मुताबिक इलाके में 25 से 30 हाथियों का दल है, जो रोज रात में खेतों में घुसकर फसलों को चट कर रहा है। यदि अभी उन्होंने फसलों को नहीं बचाया तो साल भर की मेहनत बर्बाद हो जाएगी। कोरोना काल में मजदूरी भी नहीं मिल रही है। फसल बेचकर ही वे सालभर अपना परिवार चलाएंगे। खेतों की रखवाली के लिए खलिहान में पहले किसान मचान बनाया करते थे, पर हाथियों को झुंड के आगे यह मचान भी अब कारगर नहीं हैं। हाथी आसानी से मचान तोड़ देते हैं या सूंड उठाकर मचान पर सोए व्यक्ति को घसीटकर गिरा देते हैं। कितना भी उंचा मचान बनाया जाए हाथी पांव से लात मारकर उसे तोड़ देते हैं। इसलिए किसानोें ने पेड़ पर ऊंचाई में रात को रूकने की व्यवस्था बनाई है।
ऐसे बनाया मचान
किसानों ने पेड़ में ऊंचाई पर खाट लगाई है। कुछ किसानों ने दो टहनियों के बीच रस्सी से जाली बनाई है और उसके ऊपर चटाई बिछा ली है। बारिश से बचने के लिए या तो कपड़े ताने गए हैं या प्लास्टिक की पन्नी। किसान बिहानु व जगरनाथ राम का कहना है कि ऊंचाई पर सोते हुए वे बीच-बीच में टार्च जलाकर आसानी से हाथी को देख लेते हैं। यदि हाथी खेत में घुस आता है तो वे पेड़ से ही टिन बजाकर आवाज लगाते हैं और गांव का हाथी भगाओ दस्ता सक्रिय हो जाता है। गांव वाले हाथ में मशाल लेकर, ढोल टिन आदि बजाते हुए सक्रिय होते हैं और हाथी भगाने की कवायद शुरू होती है।
फसल की रखवाली करने उठाते है बड़ा जोखिम
बीते एक सप्ताह में हाथियों ने ग्राम पंचायत कुड़ेकेला व जामचुआं में कई किसानों की फसल बर्बाद कर दी है। महिला किसान सुंदरमति के 13 खेतों में लगे धान को, किसान बालचंद के 2 खेत, बिहानु राम के 4 खेत, जगरनाथ राम के 3 खेत, मधुवन के 4 खेत, बोकस राम के 4 खेत, अजीत के 4 खेतों में लगी धान की फसल को हाथियों ने नुकसान पहुंचाया है। इसके अलावा छक्कन राम की उड़द की फसल को हाथियों ने रौंदकर बर्बाद कर दिया है। महेश राम, अजीत के बादाम की क्यारी हाथियों ने चौपट की है।
वन विभाग को नुकसान की नहीं है परवाह
ग्रामीणों ने बताया कि हाथियों को भगाने में वन विभाग की ओर से कोई मदद नहीं मिल पा रही है। वन विभाग द्वारा नाकेदार की पोस्टिंग की है। नाकेदार का हेडक्वाटर जामचुआं है, पर नाका मुख्यालय में ना रहकर वे कुनकुरी में रहते हैं।
जिले के 45 गांवों में हाथियों का है डर
जिले भर में करीब 45 गांव को हाथियों को लेकर अलर्ट किया गया है। वर्तमान में तपकरा वन परिक्षेत्र में 10, मनोरा में 1, कुनकुरी वन परिक्षेत्र में 17 और दुलदुला वन परिक्षेत्र में 11 हाथियों का दल विचरण कर रहा है।
इसलिए यहां आ रहे हाथी सरगुजा-जशपुर और कोरबा में हाथियों का निवास बन गया है। महासमुंद, धमतरी और गरियाबंद जिले में हाथियों का झुंड ओडिशा से आता है। 41 फीसदी से अधिक वन क्षेत्र वाले सरगुजा-जशपुर और कोरबा जिले में घने जंगल हैं। इसलिए हाथी यहां लंबे समय तक रहते हैं।
गश्ती दल सक्रिय है, हाथियों से छेड़छाड़ ना करें ग्रामीण ^कुनकुरी परिक्षेत्र में 17 हाथी अलग-अलग दल में सक्रिय है। विभाग का गश्ती दल इनपर निगरानी बनाए हुए है। विभाग द्वारा प्रभावित गांव में जाकर ग्रामीणों को समझाइश दी जा रही है कि दल के साथ ज्यादा छेड़खानी ना करें। हाथी अपने निर्धारित रास्ते पर ही चलता है। इस दौरान यदि खेत पड़ते हैं तो वह खेत में घुसेगा ही। किसानों को फसल नुकसान का उचित मुअावजा विभाग की ओर से दिया जाता है। मुआवजा प्रकरण बनाने की कार्रवाई लगातार चल रही है। मुख्यालय में नहीं रहने वाले नाका को नोटिस जारी किया गया है। यदि संतोषप्रद जवाब नहीं मिलता है तो उच्चाधिकारियों के निर्देश पर कार्रवाई की जाएगी।” सुरेन्द्र होता, रेंजर, कुनकुरी।

