मेरा और उसका साथ नियति ने यदि चालीस वर्षों का ही निर्धारित किया था तो किससे और क्यों शिकायत करूँ। बस यही सोचकर संतोष है कि इन चालीस वर्षों में जो प्यार और सम्मान उसने हमें दिया वह राम जैसा बेटा ही दे सकता है। उसने तो बचपन से ही अपना लक्ष्य निर्धारित कर लिया था। रहना किसे है यहां पर, इतने सम्मानित ढंग से वह विदाई लेगा इसकी कल्पना ही नहीं की थी और जाने के पश्चात उससे दुगुना सम्मान वह हमें दिलवाएगा ऐसी भी आशा नहीं थी। यह एक संयोग ही है। यह भी महज एक संयोग ही है कि बेहद शौक से बनाये अपने घर जो कोरोना जैसी भीषण आपदा मे जर्जर हो रहा था। एक नितांत अपरिचित कर्नल आशीष पान्डेय का रायगढ़ आना, मकान की तलाश में घूम भटककर उस जर्जर मकान को पसंद करना उसे रिनोवेट कर उसी में रहना और बेटे जैसे साधिकार पूर्वक हमारी खोज खबर लेते रहना। संयोग ऐसे ही नहीं बनते।
सम्मान की यदि बातें करें तो सबसे पहले शुरुआत ए.बी.पी.चैनल से हुई। उस चैनल के वार जर्नलिस्ट सुशांत सिह जो आईजोल मे बुलु से दो बार मिल चुके थे उनका फोन आया टिकट भेज रहे हैं। आप दोनों को मुम्बई आना है। ना मत कहियेगा माँ, मैं भी आपका बेटा ही हूँ। कुछ अनुरोध ठुकराये नहीं जा सकते क्योंकि उनकी भावनात्मक पकड़ बहुत गहरी होती है। इसलिए वहां जाना पड़ा। किसी सामाजिक आयोजन मे किसी का स्मरण और किसी की स्मृति मे आयोजित किसी कार्यक्रम, दोनों के बीच एक अंतर होता है जिसे भावनात्मक रूप से जुड़कर ही समझा जा सकता है। आयोजन विशेष में किसी का स्मरण महज रस्म अदायगी सी होती है वहीं किसी की स्मृति में होने वाला आयोजन उसके प्रति भावनाओं की अभिव्यक्ति होती है। इस सन्दर्भ मे ग्राम ठेंगापाली के युवाओं की माँ शारदा विकास समिति द्वारा अपने गांव में विगत 6 नवम्बर से 13 नवम्बर तक शहीद विप्लव त्रिपाठी स्मृति आमंत्रण कप प्रतियोगिता का आयोजन एक वीर देशभक सैनिक के प्रति भावनाओं की अभिव्यक्ति थी। देश के विभिन्न राज्यों से आई 16 टीम, उनके कोच, मैनेजर इत्यादि का एक सप्ताह तक सम्मानजनक और समुचित आतिथ्य का निर्वहन किया जाना सराहनीय रहा। इसके लिए वे साधुवाद के पात्र है। जहां दर्शकों को एक ओर क्रिकेट का रोमांच देखने को मिला वहीं ठेंगापाली के युवाओं मे देशभक्ति का जज्बा भी दिखाई दिया ग्रामवासियों के लिऐ यह एक तरह से ग्रामीण टी 20 का मैच था।


इसी क्रम में अमेचर कबड्डी संघ द्वारा तीन दिवसीय राज्यस्तरीय कबड्डी टूर्नामेंट दिनांक 13 नवंबर से 15 नवम्बर तक शहीद कर्नल विप्लव त्रिपाठी, अनुजा और अबीर के बलिदान को श्रद्धाजंलि देने उसकी स्मृति में रामलीला मैदान में आयोजित किया गया जहां से शहरवासियों ने उन्हें विदाई दी थी। सात सौ बालक बालिकाओं लगभग सौ आफिसियल्स और हजारों दर्शकों की मौजूदगी में यह एक सफल आयोजन रहा। विगत दो वर्षों से विश्वव्यापी कोरोना और अपनों को खोने की विभिषिका झेल रहे इस शहरवासियों को कर्नल विप्लव, अनुजा और अबीर की नृशंस हत्या ने संज्ञा शून्य कर दिया था। अमेचर कबड्डी संघ के इस आयोजन ने शहरवासियों के भीतर एक प्राणवायु का संचार कर दिया कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी। राजनीतिक, प्रशासनिक, सामाजिक, धार्मिक और मीडिया हर क्षेत्र के व्यक्तियों की वहां मौजूदगी रही। तीन दिनों तक रामलीला मैदान कुम्भ स्थल बन गया था जहां लोगों का सैलाब उमड़ता रहा। अमेचर कबड्डी संघ का प्रयास और मेहनत पूरी तरह सार्थक रहा। खासकर अंतिम दिन बालिका वर्ग का फाइनल मैच जिसमें काटें की टक्कर रही जिन्होंने देखा वे पूरी जिन्दगी इसे भूल नहीं पाऐंगे। किसी मैच को गोल्डन रेड तक खींच ले जाना दर्शकों ने पहली बार रायगढ़ के कबड्डी मैट पर देखा होगा। सभी के सहयोग और सद्भाव से ऐसे आयोजन संभव हो पाते हैं खासतौर पर रायगढ़ की लोकप्रिय सांसद गोमती साय जी जैसे जनप्रतिनिधि जिन्होंने जशपुर जिले के अपने कार्यक्रमों से बिना अनावश्यक देरी किये फारिग होकर सड़क मार्ग से चार घन्टे की यात्रा तय कर शहीद परिवार की स्मृति में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होना जरूरी समझा। कार्यक्रम की सफलता में ऐसे जिम्मेदार जन प्रतिनिधियों की संवेदनशील भावनओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
आशा त्रिपाठी

