एक पक्षकार ने दूसरे व्यक्ति के फर्जी दस्तखत करने का लगाया आरोप, एडीएम ने जांच व आपराधिक प्रकरण दर्ज करने के लिए लिखा
रायगढ़. एक बार फिर से किरारेड़ीमल धर्मादा ट्रस्ट सुर्खियों में है। अतिरिक्त कलेक्टर के एक पत्र ने मामला फिर से गर्म कर दिया है। पहले कई सालों तक ट्रस्ट पर एकाधिकार के लिए लड़ाई होती रही। अब ट्रस्ट के एक पदाधिकारी के दस्तखत को जाली कहकर शिकायत की गई है, जिसकी जांच के लिए एसपी को पत्र लिखा गया है। सेठ किरोड़ीमल धर्मादा ट्रस्ट की संपत्तियों को लेकर हमेशा से विवाद होते रहे हैं। ट्रस्ट के आय-व्यय का हिसाब मांगते-मांगते प्रशासन थक गया है लेकिन अब तक यह प्रस्तुत नहीं किया जा सका है। अब ट्रस्ट के पदाधिकारी और गिरीश परमार के नाम का जाली हस्ताक्षर कर एसडीएम कोर्ट में दस्तावेज प्रस्तुत करने का मामला सामने आया है।
लोकनाथ वर्मा पिता खेमचंद वर्मा निवासी दानीपारा ने कलेक्टर के समक्ष आवेदन प्रस्तुत कर इसकी शिकायत की थी। उसका कहना है कि ट्रस्ट के पदाधिकारी एवं गिरीश परमार ने एसडीएम कोर्ट में जो दस्तावेज प्रस्तुत किए हैं, वे कूटरचित हैं। न्यायालय को धोखा देने के लिए ट्रस्ट के पदाधिकारी एवं गिरीश परमार ने जाली हस्ताक्षर करवाए हैं। उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कर उसकी दुकान वापस दिलाने के लिए आवेदक ने शिकायत की है। प्रस्तुत आवेदन पर अतिरिक्त कलेक्टर ने एसपी रायगढ़ को सूचना दी है। एडीएम ने मामले की जांच कर प्रतिवेदन भेजने पत्र लिखा है। जाली हस्ताक्षर को मामला आपराधिक है इसलिए पुलिस को जांच के लिए दिया गया है। हस्ताक्षरों की जांच में कोई बड़ी गड़बड़ी भी सामने आ सकती है।
सही तरीके से काम नहीं कर रहा ट्रस्ट
इसके पूर्व कई बार ट्रस्ट के कामकाज पर सवाल उठाए गए हैं। दिसंबर 2021 में एसडीएम ने ट्रस्ट अध्यक्ष रमेश कुमार मोडा को पत्र लिखकर छह बिंदुओं में जवाब भी मांगा था। लोक न्याय अधिनियम के तहत संचालित होने के बावजूद ट्रस्ट इसके नियमों का पालन नहीं कर रहा है। इसलिए पिछले तीन सालों का आय-व्यय रिपोर्ट, ट्रस्ट में कौन क्या है, उनकी नियुक्तियां कब हुईं, संपत्ति कहां-कहां स्थित है, संपत्तियों का रखरखाव आदि जानकारी मांगी गई थी।

